इस्लामाबाद: रूस के उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ की मुलाकात के तीन दिन बाद इस्लामाबाद के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि 26/11 मुंबई हमला मामले की सुनवाई के शीघ्र निबटारे के लिए अतिरिक्त सबूतों की जरूरत है और कश्मीर मुद्दे को शामिल किए बिना भारत-पाकिस्तान के बीच कोई वार्ता नहीं होगी । डान ऑनलाइन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के शीर्ष सलाहकार सरताज अजीज के हवाले से कहा है कि मुंबई हमला मामले में पाकिस्तान के आरोपियों के खिलाफ सुनवाई के शीघ्र निबटारे के लिए अतिरिक्त जानकारियों की जरूरत है।
उफा में मोदी की शरीफ के साथ बैठक के दौरान भारतीय पक्ष ने जकीउर रहमान लखवी के आवाज के नमूने की मांग की, जो मुंबई हमला मामले का कथित मास्टरमाइंड माना जाता है और फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है।
अजीज ने कहा कि मोदी के साथ बैठक के दौरान शरीफ ने भारत में हुए समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले की सुनवाई में प्रगति पर जानकारी मांगी।
अजीज ने इस बात को दोहराया कि मोदी तथा शरीफ के बीच बैठक सौहार्द्रपूर्ण रही और दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति के लिए शांतिपूर्ण तथा मित्रतापूर्ण विचारों को साझा किया, ताकि दोनों देश अपने नागरिकों के आर्थिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
उन्होंने कहा कि 10 जुलाई को हुई बैठक की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि दोनों देशों के बीच सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अर्थपूर्ण बातचीत के लिए तनाव दूर हो गया।
अजीज ने कहा, "हमारे देश तथा हमारे क्षेत्र में कश्मीर, आतंकवाद, गरीबी, तथा कम मानव विकास जैसी कई चुनौतियां हैं।"
उन्होंने कहा, "लोग शांति की राह देख रहे हैं, ताकि उनकी सरकार दक्षिण एशिया में रह रहे करोड़ों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सामाजिक-आर्थिक एजेंडे पर ध्यान केंद्रित कर सके।"
अजीज ने माना कि रूस में शरीफ तथा मोदी के बीच बातचीत किसी वार्ता प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य एक बेहतर समझ तक पहुंचना था, जो दोनों पड़ोसियों के बीच तनाव तथा शत्रुता को कम करेगा।
उन्होंने कहा, "हम सब जानते हैं कि हमें कई मुद्दे सुलझाने हैं। निश्चित तौर पर कश्मीर इनमें शीर्ष पर है, लेकिन कई और महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिनमें सियाचिन, सर क्रीक तथा पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप शामिल है।"
उन्होंने कहा कि कश्मीरी तीन पीढ़ियों से पीड़ित रहे हैं।
अजीज ने कहा, "अपना भाग्य खुद लिखने का कश्मीरियों को अभी तक अधिकार नहीं मिला है। उनके जायज संघर्ष में पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ खड़ा है। शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सालाना भाषण के दौरान हमारे सैद्धांतिक रुख की स्पष्ट तौर पर पुष्टि कर दी है। अपने कश्मीरी भाइयों को राजनीतिक, नैतिक तथा कूटनीतिक समर्थन देना हम जारी रखेंगे।"
उन्होंने कहा कि शरीफ-मोदी के बीच हुई बैठक उन क्षेत्रों को चिन्हित करने का एक मौका उपलब्ध कराती है, जिसमें दोनों देश शत्रुता घटाने की दिशा में ज्यादा सहयोग को बढ़ावा दे सकते हैं।
अजीज ने कहा, "नियंत्रण रेखा तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमा (वर्किं ग बाउंड्री) पर शांति दोनों देशों के हित में है।"
शीर्ष राजनयिक ने दोहराया कि क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने के लिए दोनों पक्षों ने लंबे समय से लंबित मुद्दे सुलझाने का मार्ग खोजने के लिए ट्रैक टू वार्ता को पुनर्जीवित करने पर सहमति जताई है।
डॉन ऑनलाइन के मुताबिक, वरिष्ठ राजनयिक ने कहा कि बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पहले दिल्ली और फिर इस्लामाबाद में मुलाकात करेंगे।