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हिंदू युवती को पाकिस्तान में क्यों नहीं मिली नौकरी

 Written By: Manoj Sharma
 Published : Aug 19, 2015 03:49 pm IST,  Updated : Aug 19, 2015 09:48 pm IST

नई दिल्ली: पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ धर्म के नाम पर भेदभाव होने की घटनाएं होती ही रहती हैं। कभी कराची में डाक्टरों का कत्ल कर दिया जाता है, क्योंकि वे एक धर्म विशेष को

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संध्या को धर्म के चलते पाकिस्तान में नहीं मिली नौकरी

नई दिल्ली: पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ धर्म के नाम पर भेदभाव होने की घटनाएं होती ही रहती हैं। कभी कराची में डाक्टरों का कत्ल कर दिया जाता है, क्योंकि वे एक धर्म विशेष को मानते हैं, तो कभी हिंदू होने की वजह से पाकिस्तान में होनहार बच्चों को नौकरी तक नहीं दी जाती।

बीबीसी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार संध्या नाम की एक पाकिस्तानी युवती को पाकिस्तान में केवल इस वजह से नौकरी नहीं दी गई, क्योंकि वह हिंदू धर्म की अनुयायी है।

संध्या के पिता का नाम बिशन दास है औऱ पेशे से वह बावर्ची हैं। हृदय रोग से ग्रस्त बिशन दास की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह अपना इलाज भी नहीं करवा पा रहे हैं। पर उन्होंने अपनी गरीबी को अपनी होनहार बेटी की पढ़ाई-लिखाई के बीच कभी नहीं आने दिया। उन्होंने संध्या को एक कान्वेंट स्कूल में पढ़ाया औऱ उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए यूनिवर्सिटी भी भेजा। संध्या ने भी अपने पिता के सपनों को टूटने नहीं दिया औऱ खूब मन लगाकर पढ़ाई की। इसी का परिणाम है कि संध्या यूनिवर्सिटी से M.Sc की डिग्री हासिल करने में सफल रही।

फोटोज़ साभार: बीबीसी हिंदी

बहुत हैरानी औऱ दुख की बात है कि जिस स्कूल में उसने तालीम हासिल की, संध्या के परिजनों के अनुसार उसी स्कूल ने उसे नौकरी देने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया, क्योंकि वह एक हिंदू है।

इस्लामिक पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक हैं औऱ पाकिस्तान अपने अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार करता है, यह बीबीसी में प्रकाशित इस रिपोर्ट से साफ हो जाता है। केवल इतना ही नहीं है कि हिंदुओं को नौकरी नहीं दी जाती, बल्कि अल्पसंख्यकों को पाकिस्तान में जीवन बसर करने के लिए हर रोज़ तरह-तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है, ऐसी परेशानियां जिनके बारे में भारत के नागरिक तो कल्पना भी नहीं कर सकते। पाकिस्तान के पेशावर शहर में करीब 1200 से 1500 हिंदू परिवार रहते हैं।

बीबीसी की रिपोर्ट में मानवाधिकार एक्टिविस्ट रक्षंदा नाज़ का बयान प्रकाशित किया गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि खिबर पश्तून इलाके में रहने वाले हिंदुओं की हालत बहुत खराब है। रक्षंदा ने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह दयनीय स्थिति में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं की हालात में सुधार के लिए कदम उठाए।

पाकिस्तान को रक्षंदा की अपील को गंभीरता से लेते हुए अपना ध्यान अपने गरीब और लाचार अल्पसंख्यकों का जीवन स्तर उठाने पर लगाना चाहिए। दूसरे देशों में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने से पाकिस्तान के आंतरिक हालात में कोई सुधार नहीं होगा, बल्कि वे बद से बदतर होते चले जाएंगे।

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