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मेहुल चोकसी को नागरिकता के मामले पर बेल्जियम की कोर्ट से लगा झटका, अदालत ने कहा 'विदेशी नागरिक'

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Amit Mishra
 Published : Oct 22, 2025 12:12 pm IST,  Updated : Oct 22, 2025 12:12 pm IST

मेहुल चोकसी की नागरिकता एक विवादास्पद मुद्दा था जिसे लेकर उसे उम्मीद थी कि उसे भारत नहीं लाया जा सकेगा। लेकिन, अब इस मामले में बेल्जियम की अदालत से चोकसी को बड़ा झटका लगा है।

Mehul Choksi- India TV Hindi
Mehul Choksi Image Source : FILE/PTI

Mehul Choksi Extradition To India: भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को वापस भारत लाने के लिए हर कानूनी बाधा अब लगभग खत्म हो चुकी है। बेल्जियम की एक अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि 66 वर्षीय मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चोकसी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं। आदेश में यह भी कहा गया है कि चोकसी बेल्जियम का नहीं बल्कि विदेशी नागरिक है।

नागरिकता रहा है विवादास्पद मुद्दा

मेहुल चोकसी की नागरिकता एक विवादास्पद मुद्दा था। उसका दावा है कि उसने नवंबर 2017 में एंटीगुआ की नागरिकता प्राप्त करने के बाद 14 दिसंबर 2018 को भारतीय नागरिकता त्याग दी थी। भारत इसका विरोध करता है और जोर देकर कहता है कि वह एक भारतीय नागरिक है, इसलिए प्रत्यर्पित किया जा सकता है। भारत ने चोकसी के खिलाफ जो केस भेजा है, उसमें उस पर कई गंभीर अपराधों के आरोप हैं। इन अपराधों में धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार शामिल हैं।

  • साजिश (धारा 120-B)
  • सबूत मिटाना (धारा 201)
  • सरकारी पैसे की हेराफेरी (धारा 409)
  • धोखाधड़ी (धारा 420)
  • झूठे खाते या रिकॉर्ड (धारा 477A)
  • भ्रष्टाचार से जुड़े अपराध (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988)।
  • इन सब अपराधों की सजा एक साल से ज्यादा जेल है।

क्या कहता है बेल्जियम का कानून?

बेल्जियम में कानून के मुताबिक किसी आपराधिक गैंग का हिस्सा बनना, धोखाधड़ी, गबन या रिश्वत, जालसाजी और फर्जी कागजों का इस्तेमाल अपराध की श्रेणी में आता है। इन सबकी सजा बेल्जियम में एक साल से ज्यादा जेल है। लेकिन एक अपराध सबूत मिटाना (धारा 201, IPC) बेल्जियम में अपराध नहीं माना जाता। इसलिए इस बिंदु पर प्रत्यर्पण की मंजूरी नहीं दी गई है।

अदालत ने आदेश में क्या कहा?

बेल्जियम की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कथित अपराध 31 दिसंबर, 2016 और 1 जनवरी, 2019 के बीच हुए थे और सीमाओं का कानून भारत या बेल्जियम में समाप्त नहीं हुआ था। चोकसी के इस तर्क पर कि उसे कथित तौर पर एंटीगुआ से अपहरण कर लिया गया था और भारत में राजनीतिक उत्पीड़न और अमानवीय व्यवहार का खतरा था, बेल्जियम की अदालत ने कहा कि उन दावों का समर्थन करने के लिए 'कोई ठोस सबूत नहीं' दिया गया है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला ना राजनीतिक है, ना सैन्य, ना टैक्स से जुड़ा। भारत ने चौकसी के खिलाफ कार्रवाई उसकी जाति, धर्म या राजनीतिक विचारों के कारण नहीं की है।

भारत की ओर से बेल्जियम की अदालत में दी गई जानकारी

  • चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा।
  • वो बैरेक नंबर 12 में रहेंगे (46 वर्ग मीटर, दो सेल, निजी शौचालय)।
  • उन्हें केवल चिकित्सा या अदालत में पेशी के लिए बाहर लाया जाएगा।
  • उनका नियंत्रण जांच एजेंसी नहीं, बल्कि अदालत के पास होगा।

अंतिम नतीजे में कोर्ट ने क्या कहा?

  • मेहुल चोकसी भारत के घोटाले में आरोपी हैं।
  • यह राजनीतिक मामला नहीं है।
  • भारत में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई और सुरक्षा मिलेगी।
  • भारत ने जेल और चिकित्सा की व्यवस्था की है।

मेहुल चोकसी पर हैं गंभीर आरोप

पंजाब नेशनल बैंक घोटाला: मेहुल चौकसी पर पीएनबी के साथ मिलकर 13,850 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

मनी लॉन्ड्रिंग: मेहुल चौकसी पर मनी लॉन्डरिंग और फर्जी लेनदेन के आरोप हैं।

फर्जी गारंटी: उसने पीएनबी के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी गारंटी जारी की।

शेयर बाजार में धोखाधड़ी: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने उन्हें 10 वर्षों के लिए पूंजी बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है।

नकली हीरों की बिक्री: मेहुल चौकसी पर नकली हीरों को असली बताकर बेचने का आरोप है।

विदेशी बैंकों से बिना सिक्योरिटी के लोन: उसने विदेशी बैंकों से बिना सिक्योरिटी के लोन लिया और शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग की।

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