इस्लामाबाद: पाकिस्तान और तालिबान में लंबे समय से जंग चली आ रही है, मगर चीन अब इन दोनों में दोस्ती कराने में जुट गया है। इस कड़ी में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने काबुल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ बुधवार को एक मंच साझा किया। वांग यी ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशहाक डार अफगानिस्तान के विदेश मंत्री के साथ राजधानी काबुल में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लिया।
चीन क्यों करा रहा तालिबान की पाकिस्तान से दोस्ती
चीन का यह बैठक कराने का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के उपायों पर चर्चा करना है। साथ ही वह पाकिस्तान और तालिबान के बीच संबंधों को सुधार कर अपनी सीपीईसी योजना को अफगानिस्तान के रास्ते विस्तार देना चाहता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार जब काबुल पहुंचे, तो अफगानिस्तान के उप विदेश मंत्री मोहम्मद नईम ने उनका स्वागत किया।
पाकिस्तान त्रिपक्षीय बैठक से खुश
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इस बैठक को लेकर बयान जारी करते हुए कहा कि, "इस त्रिपक्षीय वार्ता में व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क, आतंकवाद-रोधी रणनीतियों और आपसी सहयोग बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।" इस अवसर पर इसहाक डार अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय मामलों पर भी बातचीत करेंगे। इन वार्ताओं का मकसद पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।
इससे पहले बीजिंग में हो चुकी त्रिपक्षीय वार्ता
गौरतलब है कि इससे पहले ऐसी ही एक त्रिपक्षीय बैठक मई माह में बीजिंग में आयोजित हुई थी, जिसमें पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने राजनयिक संबंधों को राजदूत स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई थी। उस बैठक में तीनों देशों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का विस्तार अफगानिस्तान तक करने की संभावनाओं पर चर्चा की थी और इस पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी।
सीपीईसी और भारत की आपत्ति
इस बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के विस्तार को लेकर है। CPEC चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का एक अहम हिस्सा है, जो चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। अब इसके अफगानिस्तान तक विस्तार की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, भारत इस परियोजना का कड़ा विरोध करता रहा है, क्योंकि यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। भारत का कहना है कि यह उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है और उसने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को लगातार उठाया है। भारत न केवल CPEC बल्कि समग्र रूप से चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना का भी विरोध करता है। (भाषा)