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खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से पहली बार चुनाव लड़ रही इस हिंदू महिला ने भारत को लेकर कही ऐसी बात कि...पाक को लगी मिर्ची

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Jan 03, 2024 08:02 am IST, Updated : Jan 03, 2024 08:02 am IST

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से चुनाव लड़ रही पहली हिंदू महिला ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर अहम बात कही है। 25 वर्षीय हिंदू महिला सवीरा डॉक्टर हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह जीतती हैं तो भारत के साथ रिश्तों को सुधारने को लेकर बात करेंगी। साथ ही हिंदुओं के उत्थान के लिए काम करेंगी।

पाकिस्तान चुनाव (प्रतीकात्मक)- India TV Hindi
Image Source : AP पाकिस्तान चुनाव (प्रतीकात्मक)

पाकिस्तान में पहली बार चुनाव लड़ रही हिंदू महिला ने भारत को लेकर ऐसी बात कह दी है कि तमाम पाकिस्तानियों को मिर्ची लग गई है। यह महिला पाकिस्तान में उस जगह से चुनाव लड़ रही है, जो काफी अशांत और आतंकवाद से ग्रस्त क्षेत्र है। मगर हिंदू महिला ने यहां से चुनाव लड़ने की हिम्मत दिखाई है। यह अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत है। यहां के बुनेर निर्वाचन क्षेत्र से आम चुनाव लड़ने वाली पहली हिंदू उम्मीदवार डॉ.सवीरा प्रकाश हैं। उन्होंने कहा है कि अगर वह चुनाव जीत जाती हैं, तो वह पाकिस्तान और भारत के बीच राजनयिक सेतु बनाने में मदद करेंगी।
 
पेशे से डॉक्टर 25 वर्षीय सवीरा ने पिछले हफ्ते बुनेर जिले में पीके-25 सामान्य सीट के लिए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से अपना नामांकन दाखिल किया था। जियो न्यूज की खबर के अनुसार, सवीरा ने कहा कि उन्हें 'बुनेर की बेटी' की उपाधि मिली है, जबकि "मुस्लिम भाइयों" ने उन्हें न केवल वोट देने का आश्वासन दिया है, बल्कि अपना पूरा समर्थन भी दिया है। डॉ. सवीरा ने कहा कि निर्वाचित होने पर वह पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की समस्याओं को हल करने में मदद करेंगी।

सवीरा ने खुद को कहा  'बुनेर की बेटी'

सवीरा ने कहा कि वह एक देशभक्त हिंदू हैं और 'बुनेर की बेटी' की उपाधि मिलने के बाद उनका मनोबल और बढ़ गया है।  उन्होंने कहा कि यदि वह खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र की इस सीट से निर्वाचित होती हैं तो वह इस्लामाबाद और नयी दिल्ली के बीच संबंधों के प्रति सकारात्मक भूमिका निभाएंगी और दोनों देशों के हिंदू बिना किसी हिचकिचाहट के उनसे संपर्क कर सकेंगे। सवीरा ने अपने पिता डॉ.ओमप्रकाश के नक्शेकदम पर चलते हुए डॉक्टर बनने का फैसला किया। ताकि वह मरीजों की सेवा कर सकें। ​ (भाषा) 

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