दुबई: ईरान समर्थित यमनी विद्रोही समूह के नेता अब्दुल मलिक अल-हौथी ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में अमेरिका ऐसी असंभव मांगें कर रहा है जिन्हें कोई भी स्वतंत्र देश स्वीकार नहीं कर सकता। गुरुवार को एक वीडियो भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि पिछले 2 हफ्तों से जारी संघर्षविराम अमेरिका और इजरायल की नाकामियों का नतीजा है। उन्होंने कहा, "अगर बातचीत सफल होती है, तो इसका नतीजा या तो लंबे समय तक स्थिरता के रूप में निकलेगा या फिर आक्रामकता का अंत होगा।" उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी शर्तों पर बातचीत में शामिल हुआ है जो अहंकार और घमंड पर आधारित हैं।
अमेरिका पर भड़के हूती नेता
अब्दुल मलिक अल-हौथी ने साफ कहा कि हूती ईरान के साथ खड़े हैं और क्षेत्रीय प्रतिरोध की मजबूती के लिए तैयार हैं। अल-हौथी का बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा हुई है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से 2 हफ्तों का यह सीजफायर चल रहा है लेकिन दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। अल-हौथी ने यह भी कहा कि अमेरिका अपनी शर्तों पर ही बातचीत करना चाहता है, जो दूसरों की स्वतंत्रता को नजरअंदाज करती है। यह रवैया क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने वाला है।
'आक्रामकता बंद करे इजरायल'
हूती नेता ने इजरायल की कार्रवाइयों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सीजफायर के बावजूद इजरायल कुछ क्षेत्रों में हमले जारी रखे हुए है। अल-हौथी के अनुसार, पूरी शांति तभी संभव है जब इजरायल अपनी आक्रामकता पूरी तरह बंद कर दे। अल-हौथी ने समूह की तैयारियों का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति बिगड़ती है, तो उनका समूह प्रभावी कदम उठाने के लिए तैयार है। यमन के लाल सागर क्षेत्र में हूती की गतिविधियां पहले से ही चर्चा में रही हैं।

ईरान के समर्थक हैं हूती
हूतियों को ईरान का समर्थक माना जाता है और वह इजरायल तथा अमेरिका विरोधी नीतियों के लिए जाना जाता है। अल-हौथी का बयान उनके समर्थकों में उत्साह बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। अल-हौथी ने इस दौरान ईरान की तारीफ करते हुए कहा कि उसने पूरे क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है। सीजफायर को उन्होंने ईरान की बड़ी जीत भी बताया। अल-हौथी ने स्पष्ट किया कि समूह किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा चाहे अमेरिका की मांगें कितनी भी कड़ी हों।
कौन हैं हूती?
हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया 'जैदी' समुदाय का एक हथियारबंद समूह है। इस समुदाय ने 1990 के दशक में तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के कथित भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए इस समूह का गठन किया था। इसका नाम संस्थापक हुसैन अल हूती के नाम पर पड़ा है। हूती खुद को ईरान समर्थक बता चुके हैं।
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