बीजिंग/सियोल: उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन मंगलवार को ट्रेन से बीजिंग पहुंच रहे हैं। वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक भव्य सैन्य परेड में शामिल होंगे। यह परेड बुधवार को होगी, जो सेकेंड वर्ल्ड वॉर के खत्म होने और जापान के खिलाफ चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित की जा रही है। यह पहली बार है जब किम जोंग उन, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन एक ही मंच पर नजर आएंगे। ये तीनों नेता अमेरिका के सबसे बड़े विरोधी माने जाते हैं, और इस आयोजन को इन तीनों देशों की एकजुटता का प्रदर्शन माना जा रहा है।
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किम के साथ कई बड़े अफसर भी मौजूद
उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी KCNA ने बताया कि किम जोंग उन सोमवार को अपनी स्पेशल ट्रेन से प्योंगयांग से बीजिंग के लिए रवाना हुए। उनके साथ विदेश मंत्री चोए सॉन हुई समेत कई बड़े अधिकारी भी हैं। दक्षिण कोरियाई मीडिया के मुताबिक, किम की ट्रेन सोमवार रात चीन के सीमावर्ती शहर डैंडॉन्ग पहुंची और इसके मंगलवार को बीजिंग पहुंचने की उम्मीद है। यह किम की 2019 के बाद पहली चीन यात्रा है और 2011 में सत्ता संभालने के बाद अपने पड़ोसी देश का कुल पांचवां दौरा है। बता दें कि चीन ने कई मौकों पर आगे बढ़कर उत्तर कोरिया की मदद की है और दोनों देशों के बीच के संबंध काफी प्रगाढ़ माने जाते हैं।
पुतिन और शी के साथ मुलाकात की संभावना
रूस के राष्ट्रपति पुतिन रविवार को शंघाई सहयोग संगठन यानी कि SCO की मीटिंग और इस परेड में शामिल होने के लिए चीन पहुंचे। रूसी क्रेमलिन के सहायक यूरी उशाकोव ने रूस की तास न्यूज एजेंसी को बताया कि पुतिन और किम के बीच एक अलग मुलाकात पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किम की शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय मुलाकात और शायद तीनों नेताओं की त्रिपक्षीय बैठक भी हो सकती है। हालांकि, इन तीनों देशों ने ऐसी किसी निजी बैठक की पुष्टि नहीं की है। बता दें कि हाल के सालों में उत्तर कोरिया ने रूस के साथ अपने रिश्तों को मजबूत किया है। उसने रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस को अपने सैनिक और हथियार दिए हैं, और बदले में आर्थिक एवं सैन्य सहायता ली है।
चीन के साथ हाल में देखने को मिला था तनाव
चीन के साथ उत्तर कोरिया के रिश्ते हाल में कुछ तनावपूर्ण रहे हैं, इसलिए किम जोंग उन का मौजूदा दौरा काफी खास माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि किम अब चीन के साथ रिश्तों को सुधारना चाहते हैं, क्योंकि चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और सहायता देने वाला देश है। किम की इस यात्रा को उत्तर कोरिया की उस कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसमें वह रूस और चीन के करीबी देशों के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है। उत्तर कोरिया ने हाल में कोरियाई प्रायद्वीप से इतर मध्य पूर्व और ताइवान स्ट्रेट जैसे मुद्दों पर भी बयान दिए हैं, जिससे वह खुद को अमेरिका के खिलाफ एकजुट मोर्चे का हिस्सा दिखाने की कोशिश कर रहा है।
किम ने किया था मिसाइल संस्थान का दौरा
बीजिंग के लिए रवाना होने से पहले किम जॉन्ग उन ने उत्तर कोरिया के मिसाइल संस्थान का दौरा किया, जहां उन्होंने 'अगली पीढ़ी' की ICBM के इंजन के विकास की समीक्षा की। KCNA के मुताबिक, यह मिसाइल कई परमाणु हथियार ले जा सकती है और अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को चकमा दे सकती है। किम की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दक्षिण कोरिया के नए उदारवादी राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने उत्तर कोरिया से बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन 2019 में ट्रंप के साथ बातचीत विफल होने के बाद उत्तर कोरिया ने वार्ता से इनकार किया है और अपने परमाणु एवं मिसाइल हथियारों के जखीरे को बढ़ाने पर जोर दिया है।