Thursday, May 23, 2024
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इजरायल में ‘गृहयुद्ध’ होते-होते रह गया? नेतन्याहू के इस फैसले से देश में कम हुआ तनाव

नेतन्याहू की न्यायिक सुधार योजना का देश में जबरदस्त विरोध हो रहा था और लोगों के सड़कों पर उतरने के कारण घरेलू संकट की स्थिति बनने लगी थी।

Edited By: India TV News Desk
Published on: March 29, 2023 6:57 IST
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Image Source : AP इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू।

तेल अवीव: क्या इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने देश को एक ‘गृहयुद्ध’ में जाने से बचा लिया है? दरअसल, इजरायल में विवादित न्यायिक सुधार योजना स्थगित किए जाने के साथ ही नेतन्याहू के साथ उलझे देश के राजनीतिक विपक्षियों ने बातचीत के लिए मंगलवार से दलों का गठन शुरू कर दिया है। नेतन्याहू की न्यायिक सुधार योजना का देश में जबरदस्त विरोध हो रहा था और लोगों के सड़कों पर उतरने के कारण घरेलू संकट की स्थिति बनने लगी थी। हालांकि यह समझौता भी आसान नहीं लग रहा है और नेतन्याहू की विरासत दांव पर लगी है।

3 महीने से पूरे देश में हो रहे थे प्रदर्शन

इजरायल किस प्रकार का देश होना चाहिए इस मौलिक मुद्दे को लेकर जारी गतिरोध के बीच इस समझौते से कुछ खास नहीं हुआ है और हालात बेहद खराब नजर आ रहे हैं। न्यायिक सुधार की योजना के खिलाफ पिछले 3 महीनों से हो रहा प्रदर्शन इस हफ्ते बहुत तेज हो गया। इजरायल के मुख्य ट्रेड यूनियन ने आम हड़ताल की घोषणा कर दी जिसके कारण अफरा-तफरी का माहौल बन गया और देश के ज्यादातर हिस्से बंदी की चपेट में आ गये, यहां तक कि अर्थव्यवस्था के ठप्प पड़ने का खतरा मंडराने लगा।

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इजरायल में पिछले कुछ हफ्तों से जोरदार प्रदर्शन हो रहे थे।

लिकुड पार्टी में नेतन्याहू की लोकप्रियता घटी
नेतन्याहू ने सोमवार की रात ‘प्राइम टाइम’ के अपने भाषण में माना कि देश में विभाजन की बातें उड़ रही हैं और इस कानून को लाने में एक महीने की देरी करने की घोषणा की। हालांकि, उसके कुछ ही घंटों के भीतर विश्लेषकों ने कहा कि शनिवार की रात रक्षा मंत्री को पद से बर्खास्त किये जाने के बाद से हंगामा बढ़ा है और नेतन्याहू की लोकप्रियता उनकी अपनी ‘लिकुड’ पार्टी में भी कम हो गई है। इन घटनाओं के कारण सबसे लंबे समय तक इजरायल का शासन चलाने वाले नेतन्याहू के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं।

नेतन्याहू के एलान के बाद तनाव हुआ कम
‘इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट’ के अध्यक्ष योहनान प्लेस्नेर ने कहा, ‘उन्होंने समझ लिया है कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं है। और बेहद अनुभवी नेतन्याहू समझ रहे हैं कि अब सुधार करने का समय है।’ प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वह ‘गृहयुद्ध से बचना चाहते हैं’ और राजनीतिक विपक्षियों के साथ समझौता करेंगे। यरूशलम में संसद भवन के सामने हजारों लोगों के प्रदर्शन के बाद नेतन्याहू ने यह बात कही। उनकी घोषणा से तनाव कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन इससे उन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है, जो इजरायल की जनता का ध्रुवीकरण कर रही हैं।

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प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ प्रदर्शन करते प्रदर्शनकारी।

‘नेतन्याहू ने अपने कई वादे पूरे नहीं किए’
नेतन्याहू इजरायल के इतिहास की सबसे घोर दक्षिणपंथी सरकार चला रहे हैं और उनके सहयोगियों ने इस कानून को लागू करने का संकल्प लिया है। तेल अवीव के निवासी फेगा गुटमैन ने मंगलवार को कहा, ‘मुझे राहत महसूस हो रही है, लेकिन संदेह भी है।’ उन्होंने कहा कि नेतन्याहू ने पिछले वर्षों में ‘हमसे बहुत सारे वादे किए हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्होंने हमेशा सभी वादे पूरे नहीं किए।’ हालांकि घोषणा से इजरायल के लोगों को मिला ब्रेक उन्हें भविष्य की चुनौतियों पर विचार करने का मौका दे रहा है।

‘आज अच्छा लग रहा है, सब कुछ शांत है’
तेल अवीव के ही रहने वाले माओर डैनियल ने कहा, ‘आज मुझे अच्छा लग रहा है, कल से सबकुछ शांत है। हमें साथ मिलकर इस परिस्थिति से निपटने का और साथ रहने का तरीका खोजना होगा।’ नेतन्याहू ने विधेयक को लागू करने की प्रक्रिया स्थगित करते हुए कहा था, ‘जब बातचीत के जरिये गृह युद्ध से बचने का अवसर है, तो मैं प्रधानमंत्री होने के नाते बातचीत के लिए समय निकाल रहा हूं।’ उन्होंने 30 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के ग्रीष्मकालीन सत्र में इसपर सहमति बनाने का संकल्प लिया।

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