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खालिस्तानियों और पाकिस्तानियों को झटका! भारत के पक्ष में ब्रिटेन सरकार ने किया ये काम

एक अधिकारी ने कहा कि अगर सिद्धू को नामित किया जाता तो ये भारत-ब्रिटेन सहयोग की नींव को ख़त्म कर देता। ब्रिटेन ने अपनी मिट्टी को भारत और उसकी अखंडता के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करने देने की अपनी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर देता।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: December 24, 2020 10:35 IST
UK avoids khalistan supporter nomination to house of lords । खालिस्तानियों और पाकिस्तानियों को झटका!- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV खालिस्तानियों और पाकिस्तानियों को झटका! भारत के पक्ष में ब्रिटेन सरकार ने किया ये काम

लंदन. खालिस्तानियों और पाकिस्तानियों को ब्रिटेन में उस समय बड़ा झटका लगा, जब Downing Street द्वारा House of Lords के लिए जारी की गई लिस्ट में खालिस्तान समर्थक Dabinderjit Singh Sidhu का नाम नहीं था। दबिंदरजीत सिंह सिद्धू सिख फेडरेशन यूके के एक प्रमुख सलाहकार है। इसके अलावा वो International Sikh Youth Federation (ISYF) का पूर्व सदस्य है, जो भारत में बैन है लेकिन यूके में इस संस्था से साल 2016 में बैन हटा दिया दया।

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मंगलवार को भारत और यूके के बीच एक संभावित बड़ा कूटनीतिक विवाद उस समय टल गया, जब हाउस ऑफ लॉर्ड्स के लिए लेबर पार्टी की तरफ से खालिस्तान समर्थक दबिंदरजीत सिंह का नामांकन या तो होल्ड कर दिया गया या फिर पार्टी के नेता Keir Starmer द्वारा वापस ले लिया गया। दबिंदरजीत सिंह सिद्धू को लेबर पार्टी द्वारा हाउस ऑफ लॉर्ड्स अपॉइंटमेंट्स कमीशन के लिए लेबर पार्टी द्वारा नामित लोगों में से एक के रूप में प्रस्तावित किया गया था लेकिन जब Downing Street द्वारा लिस्ट संबंधित लोगों की जारी की गई, उसमें दबिंदरजीत सिंह का नाम नहीं थी।

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भारतीय पक्ष इस घटनाक्रम को बेहद नजदीक से देख रहा था, लेकिन जब सूची जारी की गई उसमें कंजरवेटिव पार्टी द्वारा सुझाए गए सात नाम, लेबर पार्टी के पांच और सदन के क्रॉस-बेंच (स्वतंत्र) सदस्यों के रूप में नियुक्त किए गए चार व्यक्ति शामिल थे। ब्रिटेन के सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि अगर दबिंदरजीत सिंह सिद्धू को हाउस ऑफ लॉर्ड्स के लिए नामित कर दिया जाता तो भारत और ब्रिटेन के संबंध ऐसे समय में बिगड़ते जब बोरिस जॉनसन को 26 जनवरी के समारोह के अवसर पर भारत की यात्रा करनी है।

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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "अगर Starmer ने कार्रवाई नहीं की होती, तो सिद्धू की नियुक्ति से न केवल भारत-ब्रिटेन के संबंध खराब होते और प्रधानमंत्री जॉनसन की यात्रा में खटास आती, बल्कि ब्रिटेन में भारतीय समुदाय में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे लेबर पार्टी के नए नेता को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता। Jeremy Corbyn के समय के दौरान लेबर पार्टी और भारतीय समुदाय के लोगों के बीच खटास पैदा हो गई थी।"

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एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर सिद्धू को नामित किया जाता तो ये भारत-ब्रिटेन सहयोग की नींव को ख़त्म कर देता। ब्रिटेन ने अपनी मिट्टी को भारत और उसकी अखंडता के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करने देने की अपनी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर देता और आतंकवाद के मामलों पर सहयोग के ढांचे को हिला देता। आपको बता दें कि सिद्धू, International Sikh Youth Federation (ISYF) का पूर्व सदस्य है, जो भारत में बैन है लेकिन यूके में इस संस्था से साल 2016 में बैन हटा दिया दया।

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