नई दिल्ली: UNESCO की हालिया रिपोर्ट के आंकड़े भारतीय परिदृश्य के हिसाब से चौंकाते हैं। ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में 1 से 5 साल के मरने वाले बच्चों की संख्या कुल मरने वाले बच्चों की संख्या का 20 फीसदी है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में शिशु मृत्यु दर सबसे ज्यादा है।
क्या कहते हैं आंकड़े
मेडिकल जर्नल के नए आंकड़ों के अनुसार दुनिया में 5 साल से कम आयु में मरने वाले बच्चों की संख्या 5.9 मिलियन है जिसमें 20 फीसदी भारत से है। एक स्टडी के मुताबिक यूनिसेफ ने पाया कि 195 देशों में से केवल 62 देशों ने ही अपने लक्ष्य को पाया है जिसमें शिशु मृत्यु दर पिछले 25 सालों में दो तिहाई कम हुई है। भारत इन 62 देशों में नहीं आता है। बांग्लादेश और नेपाल ने भी अपने लक्ष्य को पूरा किया है और इन देशों में शिशु मृत्यु दर 62 फीसदी कम हो गई है। 1990- 2015 के बीच एमडीजी (मिलीनियम डेवलेपमेंट गोल) में वृद्धि हुई है तथा मृत्यु दर 53 फीसदी कम हुई है, लेकिन दुनिया एमडीजी4 को भूल रही है।
पूर्वी एशिया, प्रशांत और लैटिन अमेरिका और कैरेबियन ने अपने एमडीजी4 के लक्ष्य को पूरा किया है।
शिशु मृत्यु के दो मुख्य कारण
भारत में शिशु मृत्यु का मुख्य कारण यह है कि यहां पर निमोनिया और डायरिया की बीमारी बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है। भारत में 5 साल से कम आयु में मरने वाले बच्चों में यह बीमारी मुख्य रूप में पाई जाती है।