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Explainer: राम मंदिर में चंदा चोरी, कहां पहुंची SIT की जांच, किन लोगों से हो रही पूछताछ, डिजिटल सबूत कैसे बनी परेशानी?

 Reported By: Pawan Nara, Edited By: Shakti Singh
 Published : Jun 21, 2026 01:18 pm IST,  Updated : Jun 21, 2026 02:39 pm IST

अखिलेश यादव के आरोपों से शुरू हुआ चंदा चोरी का मामला राम मंदिर के सीसीटीवी रूम तक पहुंच चुका है। एसआईटी कुंभ के दौरान आए दान की भी समीक्षा कर रही है। कई कर्मचारियों के बयान में विरोधाभास भी मिला है।

Ram Mandir- India TV Hindi
राम मंदिर के चंदे में हेरफेर के आरोप लगे हैं Image Source : PTI

राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मामले में तीन सदस्यीय एसआईटी जांच कर रही है। यह टीम लखनऊ पहुंच चुकी है और सोमवार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट दे सकती है। जांचकर्ताओं ने गोपाल राव के भतीजे सोमेश आनंद और एक अन्य व्यक्ति से पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन दोनों कथित तौर पर उपलब्ध नहीं थे और उनके मोबाइल फोन बंद थे। दूसरे व्यक्ति की पहचान आनंद के रूप में हुई है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जो स्टाफ भर्ती की उसकी भी जांच की जा रही है। रिकॉर्ड रखरखाव से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। एसआईटी ने लंबे समय से कार्यरत सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मचारियों का विवरण भी मांगा है। जांच का दायरा बढ़ाकर जनवरी 2024 की राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद की गई नियुक्तियों, सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी पड़ताल की जा रही है।

कुंभ के दौरान मिले दान की भी जांच​​​​​​​​​​​​​​​​

स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम 66 दिनों के महाकुंभ काल के दान रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इस दौरान 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने राम मंदिर के दर्शन किए थे। सबसे बड़ा संदेह यह है कि भारी भीड़ के बावजूद दान पात्रों में जमा राशि कम रही। जांचकर्ताओं ने इस असंगति की ओर इशारा किया है। मंदिर के चार कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है, जिनके नाम मयंक, शिवम पांडे, आशीष दुबे, रत्नेश के रूप में सामने आए हैं।

सोना-चांदी के मैनेजर से भी पूछताछ

राम लला के लिए सोना/चांदी/कीमती वस्तुओं का प्रबंधन करने वाले आशीष अग्निहोत्री से भी पूछताछ की गई है। आभूषण और कीमती धातुओं के दान संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा हो रही है। इसमें एक मामला यह भी है, जिसमें एक महिला ने कथित तौर पर अपने सभी आभूषण दान कर दिए थे। फूलकांत मिश्रा दान किए गए आभूषणों की देखभाल और रखरखाव के लिए जिम्मेदार थे। वह भी जांच के दायरे में हैं। जांच टीम का ध्यान इस बात पर है कि कीमती वस्तुओं की हैंडलिंग, भंडारण और अकाउंटिंग कैसे की गई।​​​​​​​​​​​​​​​​ जांच टीम के सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है, जिसमें अपने निष्कर्षों का ब्योरा होगा और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

डिजिटल रिकॉर्ड कैसे बने परेशानी?

सूत्रों के अनुसार जांच टीम को डिजिटल रिकॉर्ड जुटाने में परेशानी हो रही है। मंदिर परिसर का सीसीटीवी फुटेज केवल 45 दिनों तक ही स्टोर रहता है। इसके बाद रिकॉर्डिंग अपने आप डिलीट हो जाती है। इससे जांचकर्ताओं के लिए पुराने वीडियो रिकॉर्ड तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है। सूत्रों के अनुसार, बैकअप सिस्टम में रिकॉर्डिंग सिर्फ 45 दिन तक सुरक्षित रहती है। नतीजतन, जांचकर्ता पिछले महीनों या पुराने वीडियो नहीं देख पा रहे हैं। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि कथित गबन कब शुरू हुआ और कितने समय तक चला। सूत्रों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। डिलीट या बदले गए डेटा को प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है।

पूछताछ में कई विरोधाभाष मिले

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार एक सूत्र ने कहा, ''एसआईटी फोरेंसिक विश्लेषण के जरिए जितना संभव हो सके पुराना फुटेज हासिल करने की कोशिश करेगी।'' अधिकारियों का कहना है कि पिछले डेढ़ महीने के भीतर हुई किसी भी छेड़छाड़ के तकनीकी निशान फोरेंसिक जांच से मिल सकते हैं। डिजिटल सबूतों की कमी के कारण एसआईटी अब मंदिर कर्मचारियों, अधिकारियों और संदिग्धों के बयानों पर ज्यादा निर्भर है। टीम इन बयानों की तुलना पहले गिरफ्तार आरोपियों के बयानों से कर रही है। सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में कई विरोधाभास मिले हैं, जिन्हें जांच में अहम सुराग माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों की सीमित उपलब्धता से जांच लंबी और कई चरणों वाली हो सकती है और अब जांच गवाहों के बयानों और संदिग्धों से पूछताछ पर केंद्रित है।

 

फूलकांत मिश्रा संदेह के घेरे में

जांच के दौरान फूलकांत मिश्रा का नाम सामने आया है वह राम मंदिर से जुड़े कानूनी मामलों की पैरवी करते थे। अब उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है। फूलकांत मिश्रा की मंदिर में दान को संभालने में अहम भूमिका थी। फूलन मिश्रा का शानदार घर है और दो इनोवा समेत चार गाड़ी हैं। अयोध्या में कई प्रॉपर्टी भी हैं। जब इंडिया टीवी की टीम फूलकर मिश्रा के घर पहुंची तो उनके बेटे ने स्वीकार किया कि उनकी गाड़ी राममंदिर में चलती है। इसके बाद उनके भाई साकेत ने हमें घर बुलाकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि साकेत जेम की उनकी दुकान है और ये घर और प्रॉपर्टी उन्होंने उस व्यापार की कमाई से खरीदी है। उनका दावा है कि उन्होंने बीस करोड़ से ज्यादा का व्यापार किया है और सालाना एक करोड़ की सेल करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके भाई की मंदिर में कोई भूमिका नहीं है। इंडिया टीवी ने जब उनकी मंदिर में मौजूदगी की तस्वीर दिखाई तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने दावा किया कि उनकी कोई गाड़ी मंदिर में नहीं चलती है, जो फूलकांत के बेटे के बयान के खिलाफ है। फूलकांत मिश्रा की दुकान रेलवे स्टेशन रोड पर है, जिस बाजार में वह दुकान है। आप देखकर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि यहां बीस करोड़ के व्यापार की कितनी संभावना है। फूलकांत मिश्रा वही हैं जो साकेत जेम्स्टोन की दुकान चलाते थे और साकेत उनके भाई हैं।

अखिलेश के आरोप से शुरू हुआ मामला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को दान के पैसे गायब होने का आरोप लगाया था। इससे सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव हो गया था। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। यह टीम मंदिर के दान में हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही है। ट्रस्ट का कहना है कि आंतरिक ऑडिट चल रहा है और अब तक आरोपों का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं मिला है। उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रामभक्‍तों को भरोसा दिया है कि एसआईटी जांच ''दूध का दूध और पानी का पानी'' कर देगी।

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