दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग इन दिनों बिहार में आस्था का केंद्र बना हुआ है। करीब 210 मीट्रिक टन वजनी यह विशाल शिवलिंग पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर तक ले जाया जाना है। फिलहाल यह शिवलिंग गोपालगंज में खड़ा है, जिसे नारायणी नदी (गंडक) पार कर पूर्वी चंपारण पहुंचाया जाना प्रस्तावित है। सबसे बड़ी चुनौती गंडक नदी पर स्थित जर्जर डुमरियाघाट सेतु को लेकर है। पुल की वर्तमान स्थिति और शिवलिंग के अत्यधिक वजन को देखते हुए यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतना भारी शिवलिंग नदी को सुरक्षित तरीके से कैसे पार करेगा। इसी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर महामंथन शुरू हो गया है।
नदी पार कराना बड़ी चुनौती
रविवार की शाम गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा और पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने मौके पर पहुंचकर शिवलिंग का जायजा लिया। साथ ही डुमरियाघाट सेतु की तकनीकी स्थिति की जांच के लिए पुल निगम और विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम को बुलाया गया है। यदि इंजीनियरों की टीम सेतु से शिवलिंग पार कराने की अनुमति नहीं देती है, तो इसे नदी पार कराना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना
गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है। सभी पहलुओं, सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और वैकल्पिक व्यवस्था पर मंथन के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी तैयारी और अनुमति के बिना शिवलिंग को नारायणी नदी पार नहीं कराया जाएगा। वहीं, एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि शिवलिंग को देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष योजना लागू की जा रही है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
जानें शिवलिंग के बारे में
बता दें कि तमिलनाडु के महाबलीपुरम में 33 फुट ऊंचा और 33 फुट लंबा शिवलिंग तैयार किया गया था, जिसे पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर में नवनिर्मित विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। पूरे 30 दिनों में 2178 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर शिवलिंग गोपालगंज पहुंचा है, जहां आम से लेकर खास लोग इसके स्वागत करने में जुटे हुए हैं। (रिपोर्ट: अयाज अहमद)
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