बिहार पूर्वी चंपारण के चकिया में विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इस मंदिर में स्थापना के लिए 33 फीट का शिवलिंग तैयार किया गया है। शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में बीते दस साल से हो रहा था। 33 फीट का शिवलिंग एक ग्रेनाइट पत्थर है। इस शिवलिंग को सड़क मार्ग से महाबलीपुरम से करीब 100 चक्कों वाले ट्रक से पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर लाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, इस शिवलिंग को पटना से 120 किलोमीटर दूर पूर्वी चंपारण में बन रहे विराट रामायण मन्दिर में स्थापित किया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है इस शिवलिंग और पूर्वी चंपारण में बन रहे विराट रामायण मन्दिर की खासियत।
कब तक बिहार पहुंचेगा शिवलिंग?
जानकारी के मुताबिक, शिवलिंग को लेकर ट्रक जबलपुर से नागपुर के रास्ते NH-44 पर गुजर रहा है। ये शिवलिंग करीब 20 दिन बाद बिहार पहुंच जाएगा। बता दें कि ट्रक को 5 km प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर बिहार लाया जा रहा है। इस पर शिवलिंग पर करीब तीन करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। नये साल में फरवरी महीने तक यह शिवलिंग विराट रामायण मंदिर में स्थापित हो जाएगा।
क्या है शिवलिंग की खासियत?
तमिलनाडु से बिहार लाए जा रहे शिवलिंग का वजन 210 मीट्रिक टन है। रास्ते में विभिन्न राज्यों के शहरों में शिवलिंग का भव्य स्वागत भी किया जा रहा है। यह देश में किसी भी मंदिर में स्थापित होने वाला सबसे बड़ा शिवलिंग माना जा रहा है जिसे विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। विराट रामायण मन्दिर तीन मंजिला होगा। मन्दिर में काले ग्रेनाइट की चट्टान से बन रहे विशाल शिवलिंग की स्थापना होगी। चेन्नई के निकट महाबलिपुरम में करीब 250 टन वजन के ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर की चट्टान को तराशकर मुख्य शिवलिंग के साथ सहस्रलिंगम भी बनाया गया है। आठवीं शताब्दी के बाद सहस्रलिंगम का निर्माण भारत में नहीं हुआ है। शिवलिंग का वजन 200 टन, ऊंचाई 33 फीट और गोलाई 33 फीट है। यह विशालतम शिवलिंग रामेश्वरम की याद कराएगा।

कहां बन रहा है रामायण मंदिर?
विराट रामायण मंदिर का निर्माण बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया और चकिया के बीच जानकीनगर में हो रहा है। पटना से इस मंदिर की दूरी 120 किलोमीटर होगी। विराट रामायण मंदिर में चार आश्रम होंगे। चकिया का विराट रामायण मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण हो जाने पर यह विश्व का सबसे बड़ा मंदिर होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि विराट रामायण मंदिर का निर्माण हो जाने पर राज्य और देश ही नहीं बल्कि के दुनिया के विभिन्न देशों से भक्त (तीर्थ यात्री) मंदिर की भव्यता देखने के लिए आएंगे। ये मंदिर बिहार के बड़े धार्मिक पर्यटन स्थलों में भी शुमार हो जाएगा।
क्या होगी इस मंदिर की खासियत?
विराट रामायण मंदिर का निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है। आचार्य किशोर कुणाल ने इसकी परिकल्पना और शुरुआत की थी। विराट रामायण मंदिर का प्रवेश द्वार,गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग, गर्भ गृह का पाइलिंग (नींव) आदि का काम पूरा हो गया है। आकार में यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे और मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट,चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी।
पूर्वी चंपारण के केसरिया के निकट कैथवलिया-बहुआरा में पटना के महावीर मन्दिर द्वारा बन रहे संसार के विशालतम मन्दिर का निर्माण कार्य 2023 में शुरू हो गया था। वर्ष 2012 में मन्दिर का भूमिपूजन हुआ था। कंबोडिया के अंकोरवाट मन्दिर से बड़े बन रहे इस मन्दिर का नाम पहले विराट अंकोरवाट मन्दिर था। कंबोडिया सरकार की आपत्ति और जमीन क्रय में देरी से विलंब हुआ। आखिरकार सभी बाधाओं को पार कर 270 फीट के सबसे ऊंचे शिखर के साथ 540 फीट चौड़े और 1080 फीट लंबे विराट रामायण मन्दिर का बनना शुरू हो गया। मंदिर के लिए जमीन दान करने वाले मो. इश्तियाक खान भी हैं।

मन्दिर में कुल 22 देवालय बनेंगे
विराट रामायण मन्दिर में कुल 22 देवालय बनेंगे। एक देवालय गिरिधर गोपाल भगवान कृष्ण का होगा। बाकी के 21 देवालयों में धनुषभंग, विश्वामित्र आश्रम में भाइयों समेत श्रीराम की शिक्षा, अहिल्या उद्धार, शबरी के जूठे बेर, केवट प्रसंग, भरत मिलाप समेत रामायण के विभिन्न प्रसंगों को मूर्त रूप दिया जाएगा। विराट रामायण मन्दिर कैथवलिया-बहुआरा के जिस क्षेत्र में बन रहा है वहां जनकपुर से लौटती राम बारात के दूसरे दिन रूकने की मान्यता है। उस याद को संजोये रखने के लिए 120 एकड़ के परिसर में विवाह घर और धर्मशाला बनेंगे। अयोध्या से जनकपुर तक बन रहे राम जानकी मार्ग पर विराट् रामायण मन्दिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव होगा।
बगैर अग्रिम भुगतान के हो रहा काम
कंबोडिया के अंकोरवाट मन्दिर का शिखर 220 फीट है। भारत में और भी मन्दिर बन रहे हैं जहां एक शिखर 270 फीट से ऊंचा हो सकता है। लेकिन एक साथ इतने ऊंचे शिखर विराट रामायण मन्दिर में ही देखने को मिलेंगे। विराट रामायण मन्दिर में पाइलिंग कार्य में 1050 टन स्टील और 15 हजार क्यूबिक मीटर कंक्रीट की खपत होगी। निर्माण में लगनेवाली सामग्रियां महावीर मन्दिर उपलब्ध कराएगा। बगैर अग्रिम भुगतान के एजेंसी कार्य कर रही है। कार्य के आधार पर भुगतान किया जाएगा। विराट रामायण मन्दिर पटना से 120 किमी तथा वैशाली से 60 किमी की दूरी पर वर्तमान केसरिया-चकिया पथ पर अवस्थित है। यह मन्दिर चार गांवों और तीन पंचायतों की सीमा में पड़ता है।
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