विशेष ब्लॉग की लेखिका हैं नेहा विश्वनाथन :- Indiequill में आज एक दिलचस्प पोस्ट पढ़ने के बाद मुझे अचानक लगा कि क्यों न परिवार की एक गुप्त बात को आम कर दिया जाए। मेरी मां चार बहन-भाईयों में सबसे बड़ी थीं और मानसिक रुप से बहुत मज़बूत भी थी। वह बहुत तुनक मिजाज़ थी और बाक़ी भाई बहनों को अपनी उंगली पर नचाती थी।
उस ज़माने में साधना बहुत मशहूर अदाकारा थी। मेरी मां ने अपनी छोटी बहन (मेरी चिट्टी), जो उस समय 12 साल की रही होंगी, के दिमाग़ में ये बात डाल दी कि उन पर साधना कट बहुत फ़बेगा। मेरी भोली भाली चिट्टी राज़ी हो गई। मेरी मां ने चिट्टी के साधना कट की तैयारी कर ली।
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मुझे लगता है कि मेरी चिट्टी को उस बुरे हेयर कट से उबरने में काफ़ी समय लगा। शायद वो आइने में खुद को देखकर रोने भी लगी थीं। घर में कोहराम मच गया और दादा जी तो आगबबूला हो रहे थे।
मुझे ऐसा लगता है दादा जी मां से तो नाराज़ थे ही लेकिन उनसे कहीं ज़्यादा चिट्टी से नाराज़ थे क्योंकि ये जानते हुए भी कि मां कितनी शरारती हो सकती हैं, उन्होंने उन पर विश्वास कर लिया।
काश किसी से तब चिट्टी की साधना कट वाली तस्वीर खींची होती। दूसरे तरफ ये साबित करता है कि मैं जो हूं वो हूं क्योंकि मेरी मां मेरी मां हैं। मेरे ज़िद्देपन, बेहूदा आइडिए और सनकीपन के लिये मेरी मां ज़िम्मेवार हैं। ठीक है?
पुनश्य – रुको, मेरे पिता पहले से ही ये करते हैं!
(इस विशेष ब्लॉग को नेहा विश्वनाथन ने लिखा है, जो लंदन में रहती हैं। नेहा ने अपना यह ब्लॉग मूल रूप से अंग्रेजी में https://www.withinandwithout.com/ पर पोस्ट किया है। हम इस ब्लॉग का हिंदी रुपांतरण साभार स्वरूप यहां पोस्ट कर रहे हैं।)