1. Hindi News
  2. Explainers
  3. Explainer: मोदी सरकार 3.O में लोकसभा स्पीकर का पद क्यों है इतना खास? आखिर कैसे चुने जाते हैं ये और कितनी होती है शक्तियां

Explainer: मोदी सरकार 3.O में लोकसभा स्पीकर का पद क्यों है इतना खास? आखिर कैसे चुने जाते हैं ये और कितनी होती है शक्तियां

 Published : Jun 10, 2024 01:28 pm IST,  Updated : Jun 25, 2024 04:29 pm IST

लोकसभा के स्पीकर पद के लिए जहां NDA ने बीजेपी के सांसद और पूर्व स्पीकर ओम बिरला को उम्मीदवार बनाया है वहीं विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ने कांग्रेस के सांसद कोडिकुन्नील सुरेश पर दांव खेला है।

loksabha Speaker name- India TV Hindi
मोदी सरकार 3.O में लोकसभा स्पीकर का पद क्यों है इतना खास? Image Source : INDIA TV

लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए सरकार और विपक्ष के बीच मंगलवार को आम-सहमति नहीं बन सकी और अब NDA के उम्मीदवार तथा BJP सांसद ओम बिरला का मुकाबला कांग्रेस के कोडिकुन्नील सुरेश के साथ होगा। लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए मतदान बुधवार को होगा। बिरला और सुरेश ने मंगलवार को क्रमश: NDA और विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के उम्मीदवारों के रूप में अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। पिछली लोकसभा में भी अध्यक्ष रह चुके बिरला को NDA की तरफ से सर्वसम्मति से उम्मीदवार बनाया गया है। यदि वह बुधवार को हुए मतदान में जीत जाते हैं तो 25 साल में इस पद पर दोबारा आसीन होने वाले पहले व्यक्ति होंगे।

टूट सकता है बलराम जाखड़ का रिकार्ड

JDU के नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने इस बारे में बोलते हुए कहा कि बिरला का नाम NDA के सभी दलों ने सर्वसम्मति से तय किया और BJP के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह भी समर्थन हासिल करने के लिए विपक्ष के पास पहुंचे। बिरला ने नामांकन दाखिल करने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। वह राजस्थान के कोटा से लगातार तीसरी बार BJP के टिकट पर सदस्य निर्वाचित हुए हैं। यदि फिर से ओम बिरला स्पीकर चुने जाते हैं और इस पद पर वे अपना दूसरा कार्यकाल भी पूरा कर लें तो बलराम जाखड़ का बनाया रिकार्ड टूट जाएगा। बता दें कि बलराम जाखड़ एकमात्र ऐसे स्पीकर रहे हैं तो 2 बार चुने गए और कार्यकाल भी पूरा किया। सबसे पहले आइए जानते हैं कि आखिर कैसे चुने जाते है लोकसभा स्पीकर?

कैसे चुने जाते हैं लोकसभा स्पीकर?

संविधान के मुताबिक, नई लोकसभा के पहली बार बैठक से ठीक पहले अध्यक्ष का पद खाली हो जाता है। सदन के वरिष्ठ सदस्यों में से राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रोटेम स्पीकर नए सांसदों को पद की शपथ दिलाते हैं। इसके बाद, सदन के सदस्यों में से एक बहुमत से अध्यक्ष चुना जाता है, वैसे तो लोकसभा अध्यक्ष के रूप में चुने जाने के लिए कोई विशेष मानदंड नहीं है, लेकिन संविधान और संसदीय नियमों की समझ होना एक फ़ायदेमंद बात है। पिछली दो लोकसभाओं में, जिनमें भाजपा का बहुमत था। इस कारण बीजेपी ने सुमित्रा महाजन और ओम बिड़ला को लोकसभा स्पीकर अध्यक्ष बनाया था। पर अब इस पद के लिए NDA और I.N.D.I.A. के प्रत्याशियों के बीच चुनाव होगा।

क्यों अहम है सभी पार्टियों के लिए पद?

  • लोकसभा स्पीकर एक संवैधानिक पद है। उसकी मंजूरी के बिना सदन में कुछ भी नहीं होता।
  • लोकसभा स्पीकर काफी खास पद है। इनका फैसला ही आखिरी फैसला होता है। संसद में इनकी निर्णायक भूमिका होती है।
  • बहुमत साबित करने के दौरान जब दल-बदल कानून लागू होता है तो ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका और बढ़ जाती है।
  • संसद को स्थगित करने से लेकर किसी को सस्पेंड करने तक हर अधिकार स्पीकर के पास होते हैं।
  • स्पीकर के पास संसद के सदस्यों की योग्यता और अयोग्यता का फैसला करने का पूरा अधिकार होता है। चाहे कोई रेजिल्यूशन हो, मोशन या फिर सवाल, स्पीकर का फैसला निर्णायक होता है।

उदाहरण से समझें स्पीकर की शक्ति

साल 1998 की लोकसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को जनता ने पूर्ण बहुमत नहीं दिया। भाजपा 182 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। अटल बिहारी वाजपेयी को केंद्र में अपनी सरकार बनाने के लिए टीडीपी से बाहरी समर्थन मिला तो फिर सत्ता में एनडीए सरकार आ गई। फिर जब जयललिता की AIADMK ने अटल सरकार से अपना समर्थन वापस लिया तो अटल सरकार अल्पमत में आ गई। उस समय स्पीकर टीडीपी के हिस्स में थी और टीडीपी ने जीएमसी बालयोगी को लोकसभा स्पीकर बनाया था। फ्लोर टेस्ट हुआ पक्ष में 269 वोट गिरे जबकि विपक्ष में भी 269 वोट गिरे थे, फिर स्पीकर ने कांग्रेस सांसद गिरधर गमांग को वोट डालने की अनुमति दी थी। फिर 1 महज 1 वोट से अटल जी की सरकार गिर गई। 

बता दें कि उस समय गिरधर बिना इस्तीफा दिए ओडिशा के सीएम बन गए थे, और वोटिंग के दिन वह सदन में मौजूद थे। ऐसे में विवेक के आधार पर लोकसभा स्पीकर ने उनको वोट डालने की परमिशन दी थी। हालांकि तत्कालीन लोकसभा स्पीकर चाहते तो गिरधर गमांग को वोट डालने से रोक भी सकते थे। हां तो अब ये होती है स्पीकर की पावर, जिसकी वजह से टीडीपी और बीजेपी अपना-अपना स्पीकर बनाना चाहती हैं।

ये भी पढ़ें:

Explainer: एक से ज्यादा Credit Card करते हैं इस्तेमाल! ऐसे करें मैनेज नहीं बिगडे़गा मंथली बजट

Explainer: कैसे शपथ लेंगे जेल में बंद 'माननीय', जानें क्या हैं नियम; क्या रद्द भी हो सकती है सदस्यता?

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Explainers से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।