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Sheetala Ashtami 2026 Puja Vidhi, Katha Live: शीतला अष्टमी पर कैसे और कब करे मां शीतला की पूजा, क्या है विधि और व्रत कथा, जानें हर जानकारी यहां

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Updated : Mar 11, 2026 07:31 am IST

Sheetala Ashtami 2026 Puja Vidhi, Katha Live: शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जा रही है। इस दिन मां शीतला की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में मां शीतला को रोगों का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। यहां आप जानेंगे शीतला अष्टमी की पूजा विधि, मुहूर्त, कथा, मंत्र और गीत।

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शीतला अष्टमी पूजा विधि और कथा Image Source : CANVA

Sheetala Ashtami 2026 Puja Vidhi, Katha Live: शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक बड़ा त्योहार है जिस दिन बासी भोजन का सेवन किया जाता है। इतना ही नहीं माता शीतला को भी इस दिन बासी भोजन का ही भोग लगता है। इस पर्व को बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस साल शीतला अष्टमी पूज का शुभ मुहूर्त 11 मार्च 2026 की सुबह 6 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस दिन माता शीतला को मीठे चावल और दही का भोग जरूर लगाएं। इससे माता शीघ्र ही प्रसन्न हो जाएंगे। यहां आप जानेंगे शीतला अष्टमी की कथा, पूजा विधि, मुहूर्त इत्यादि से जुड़ी अहम जानकारी।

शीतला अष्टमी पूजा विधि (Sheetala Ashtami Puja Vidhi)

शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर माता शीतला को भी ठंडा जल अर्पित करें। इसके बाद पूजा की 2 थालियां लें। एक थाली में दही, नमक पारे, रोटी, बाजरा, मीठे चावल और अन्य वो सभी चीजें रखें जो आपने शीतला सप्तमी पर बनाई हैं। दूसरी थाली में आटे का दीपक, रोली, सिक्के, मेहंदी, वस्त्र, अक्षत और एक ठंडा पानी से भरा लोटा रखें। इसके बाद सभी पूजा सामग्रियों के साथ माता की विधि विधान पूजा करें। उन्हें भोग अर्पित करें। ध्यान रहे कि जो आपने आटे का दीपक बनाया है उसे घर के मंदिर में बिना जलाए ही रखना है क्योंकि इस दिन दीपक नहीं जलाया जाता है। इस तरह पूजा करने के बाद नीम के पेड़ पर जल चढ़ाएं। इस दिन माता शीतला के मंदिर भी जरूर जाना चाहिए। मां को मेहंदी और नए वस्त्र जरूर चढ़ाने चाहिए। पूजा के समय शीतला अष्टमी की कथा सुनना और माता की आरती करना बिल्कुल भी न भूलें। अंत में माता का प्रसाद जरूर ग्रहण करें।

शीतला अष्टमी की कथा (Sheetala Ashtami Ki Katha)

शीतला अष्टमी की कथा अनुसार एक बार शीतला माता ने सोचा कि चलो आज देखूं कि धरती पर मेरी पूजा कौन करता है। ये सोचकर शीतला माता राजस्थान के डुंगरी गांव में पहुंची और देखा कि इस गांव में उनका कोई मंदिर नहीं है और ना ही यहां कोई उनकी पूजा करता है। माता शीतला गांव की गलियों में घूम ही रही थी कि तभी किसी ने गलती से उन पर चावल का उबला पानी फेंक दिया। इससे शीतला माता के शरीर में फफोले पड गये और माता का पूरा शरीर जलने लगा।

शीतला माता गांव में इधर-उधर भागते हुए चिल्लाने लगी अरे में जल गई। कोई मेरी सहायता करो। लेकिन उस गांव में शीतला माता की सहायता किसी ने नहीं की। लेकिन वहीं पर अपने घर के बाहर एक कुम्हारन महिला बैठी थी। लेकिन जब उस कुम्हारन की नजर बूढ़ी माई पर पड़ी तो उसने कहा हे मां! तू यहां आकार बैठ जा, मैं तेरे शरीर के ऊपर ठंडा पानी डालती हूं जिससे तुझे आराम मिल जाएगा। कुम्हारन ने उस बूढी माई पर खूब ठंडा पानी डाला और बोली हे मां मेरे घर में रात की बनी हुई राबड़ी और थोड़ा दही रखा है। तू दही-राबड़ी खा ले इससे भी तुझे आराम मिलेगा। जब बूढी माई यानी माता शीतला ने ठंडी ज्वार के आटे की राबड़ी और दही खाया तो उनके शरीर को बहुत ठंडक मिली।

फिर उस कुम्हारन ने कहा मां बैठजा तेरे सिर के बाल बहुत बिखरे हैं मैं तेरी चोटी गूंथ देती हूं। कुम्हारन माई जैसे ही चोटी गूंथने हेतु बालों में कंगा करने लगी तो उसकी नजर बूढ़ी माई के सिर के पीछे पड़ी, तो वो आश्चर्य में पड़ गई। कुम्हारन ने देखा कि एक आंख बालों के अंदर छुपी है। यह देखकर कुम्हारन डर से घबराकर भागने लगी तभी उस बूढ़ी माई ने कहा - बेटी तू डर मत। मैं कोई भूत-प्रेत नही हूं। मैं शीतला देवी हूं मैं तो इस धरती पर ये देखने आई थी कि कौन मुझे पूजता है। इतना कहकर माता अपने असली रूप में आ गईं। माता के दर्शन पाकर कुम्हारन सोचने लगी कि अब मैं गरीब इन माता को कहां बिठाऊ। तब माता बोली - हे बेटी तुम किस सोच मे पड गई हो?

कुम्हारन ने हाथ जोड़कर माता से कहा - हे मां! मेरे घर में तो चारों तरफ दरिद्रता बिखरी हुई है। मुझे समझ ही नहीं आ रहा कि आपको कहां बिठाऊ। मेरे घर में ना तो चौकी है और ना ही बैठने का कोई आसन है। तब शीतला माता ने उस कुम्हारन के घर पर खड़े हुए गधे पर बैठ कर और एक हाथ में झाड़ू दूसरे हाथ में डलिया लेकर उस कुम्हारन के घर से दरिद्रता को झाड़कर डलिया में भरकर बाहर फैंक दिया। फिर उस कुम्हारन से कहा - हे बेटी मैं तेरे भक्ति-भाव से प्रसन्न हूं, अब तुझे जो भी वरदान चाहिये मुझसे मांग ले।

कुम्हारन ने हाथ जोड़ कर कहा हे माता मेरी इच्छा है अब से आप इसी डुंगरी गांव मे स्थापित होकर यहीं निवास करें और जिस प्रकार मेरे घर की दरिद्रता को आपने झाड़ू से साफ कर दिया है वैसे ही आपकी जो भी भक्त चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी को पूजा करे और अष्टमी के दिन आपको ठंडा जल, दही व बासी ठंडा भोजन चढ़ाये उसके घर में दरिद्रता का कभी वास न होने पाए और आपकी पूजा करने वाली महिला का अखंड सुहाग बना रहे और उसकी गोद हमेशा भरी रहे। साथ ही जो पुरुष शीतला अष्टमी को बाल ना कटवाये, धोबी को कपड़े धुलने ना दें और आप पर ठंडा जल चढ़ाएं और  परिवार सहित बासी भोजन करे उसके काम धंधे व्यापार में भी कभी दरिद्रता ना आये।

माता तथास्तु कहते हुए बोलीं हे बेटी जो तूने वरदान मांगे हैं मैं सब तुझे देती हूं। तुझे आर्शिवाद देती हूं कि मेरी पूजा का मुख्य अधिकार इस धरती पर सिर्फ कुम्हार जाति का ही होगा। कहते हैं तभी से डुंगरी गांव में शीतला माता स्थापित हो गईं और उस गांव का नाम हो गया शील की डुंगरी। 

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    Posted by Laveena Sharma

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    अगर आप अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी करना चाहते हैं तो आज के दिन आपको सुबह स्नान आदि के बाद शीतला मां का ध्यान करते हुए घर पर ही एक आसन बिछाकर बैठना चाहिए और मंत्रमहोद्धि में दिये देवी मां के इस नौ अक्षरों के मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है- 'ऊँ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।' आज आपको इस मंत्र का कम से कम 1 माला, यानी 108 बार जाप करना चाहिए।

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    • इस दिन खुद भी सिर्फ बासी भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
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  • 7:54 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Sheetala Ashtami Puja Samagri: शीतला अष्टमी पूजा सामग्री

    रोली, मौली, चावल, हल्दी, फूल, वस्त्र, एक दीपक, होली वाली बड़कुले की माला, आम के पत्ते, जल का कलश, सिक्के, नीम और भोग की चीजें।

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    Posted by Laveena Sharma

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