इंसान को जिंदा रहने के लिए भोजन से ज्यादा पानी की जरूरत होती है। पानी के बिान जीवन की कल्पना करना भी असंभव है। पानी प्यास बुझाने के अलावा बॉडी को हाइड्रेट रखने का भी काम करता है। आजकल आमतौर पर सभी घरों में पानी को साफ करने के लिए वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन गांव में आज भी लोग नल का पानी या मटके में रखा पानी ही पीते हैं। शहरों में RO का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि रिपोर्ट्स बताती है कि शहरों में मिलने वाला पानी पीने लायक नहीं है। ऐसे में पानी को प्यूरीफाई करना बेहद जरूरी है। अब सवाल उठता है कि RO का पानी या नॉर्मल पानी सेहत के लिए कौन सा ज्यादा फायदेमंद है। तो चलिए यहां जानते हैं।
RO पानी उन इलाकों के लिए है जहां पानी में भारी धातुएं या बहुत ज्यादा खारापन है।
फायदे
यह पानी से आर्सेनिक, फ्लोराइड, सीसा और मरकरी जैसे खतरनाक रसायनों को निकाल देता है।
बैक्टीरिया और वायरस को पूरी तरह खत्म कर देता है।
नुकसान
मिनरल्स की कमी: RO प्रक्रिया पानी से कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स को भी छान देती है, जिससे पानी "Dead Water" जैसा हो जाता है।
विटामिन B12 की कमी: लंबे समय तक कम मिनरल वाला पानी पीने से शरीर में विटामिन B12 की कमी का खतरा बढ़ सकता है।
पानी की बर्बादी: 1 लीटर शुद्ध पानी के लिए RO लगभग 3 लीटर पानी बर्बाद करता है।
अगर आपके यहां पानी का स्रोत शुद्ध है जैसे नगर निगम का सप्लाई वाला पानी या पहाड़ी झरना तो इसे पीना बेहतर हो सकता है।
फायदे
इसमें प्राकृतिक रूप से मिनरल्स मौजूद होते हैं जो हड्डियों और दिल की सेहत के लिए अच्छे हैं।
मटके में रखा पानी नेचुरल तरीके से ठंडा होता है और शरीर के pH लेवल को संतुलित रखता है।
नुकसान
अगर पाइपलाइन पुरानी है या स्रोत गंदा है, तो इसमें इन्फेक्शन जैसे टाइफाइड, हैजा का डर रहता है।
इसमें कीटनाशक या फैक्ट्री का कचरा मिला होने की संभावना रहती है।
डब्ल्यूएचओ (WHO) और विशेषज्ञों के अनुसार
TDS चेक करें: अगर आपके पानी का TDS 300-500 mg/L से कम है, तो आपको RO की जरूरत नहीं है। आप साधारण UV फिल्टर या पानी उबालकर पी सकते हैं।
अगर TDS 500 से ज्यादा है तो RO जरूरी है, लेकिन सुनिश्चित करें कि उसमें TDS Controller या Mineral Cartridge लगा हो, जो जरूरी मिनरल्स वापस पानी में जोड़ दे।
मटके का जादू: सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि RO के पानी को मिट्टी के मटके में रख दें। इससे पानी की एसिडिटी कम होती है और उसमें नेचुरल ठंडक आती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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