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अपनी ही जाल में फंस गई कंपनियां, पुश नोटिफिकेशन से परेशान यूजर्स धड़ाधड़ ऐप्स कर रहे डिलीट

Published : Jun 12, 2026 06:38 pm IST,  Updated : Jun 12, 2026 06:38 pm IST
क्या आप भी फूड डिलिवरी, शॉपिंग, लोन, हेल्थ, इंश्योरेंस जैसे ऐप्स के पुश नोटिफिकेशन से परेशान हैं? हाल में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन पुश नोटिफिकेशन से परेशान होकर ज्यादातर यूजर्स ऐप्स डिलीट कर रहे हैं। इसकी वजह से कंपनियों की टेंशन बढ़ गई है। लोगों को अलर्ट करने वाले इस बिजनेस मॉड्यूल का दांव कंपनियों पर उल्टा पड़ रहा है।
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क्या आप भी फूड डिलिवरी, शॉपिंग, लोन, हेल्थ, इंश्योरेंस जैसे ऐप्स के पुश नोटिफिकेशन से परेशान हैं? हाल में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन पुश नोटिफिकेशन से परेशान होकर ज्यादातर यूजर्स ऐप्स डिलीट कर रहे हैं। इसकी वजह से कंपनियों की टेंशन बढ़ गई है। लोगों को अलर्ट करने वाले इस बिजनेस मॉड्यूल का दांव कंपनियों पर उल्टा पड़ रहा है।
CleverTap की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 30 प्रतिशत लोग ऐप्स के पुश नोटिफिकेशन से परेशान होकर ऐप डिलीट या अनइंस्टॉल कर रहे हैं। कस्टमर इंगेजमेंट प्लेटफॉर्म ने इसके लिए करीब 300 अरब ऐप्स का विशलेषण किया और पाया कि ज्यादातर यूजर्स विज्ञापन और पुश नोटिफिकेशन से परेशान होकर इन्हें डिलीट कर रहे हैं।
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CleverTap की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 30 प्रतिशत लोग ऐप्स के पुश नोटिफिकेशन से परेशान होकर ऐप डिलीट या अनइंस्टॉल कर रहे हैं। कस्टमर इंगेजमेंट प्लेटफॉर्म ने इसके लिए करीब 300 अरब ऐप्स का विशलेषण किया और पाया कि ज्यादातर यूजर्स विज्ञापन और पुश नोटिफिकेशन से परेशान होकर इन्हें डिलीट कर रहे हैं।
कंपनियां ऐप्स में पुश नोटिफिकेशन फीचर को यूजर्स को अलर्ट करने या फिर अपनी तरफ ध्यान खींचने के लिए देती हैं। इसके अलावा ग्लोबल डिजिटल रिसर्च प्लेटफॉर्म की डेटा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के आखिर तक भारत में 1.06 अरब एक्टिव मोबाइल कनेक्शन थे और कुल आबादी में से 70 प्रतिशत यूजर्स इंटरनेट यूज कर रहे थे।
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कंपनियां ऐप्स में पुश नोटिफिकेशन फीचर को यूजर्स को अलर्ट करने या फिर अपनी तरफ ध्यान खींचने के लिए देती हैं। इसके अलावा ग्लोबल डिजिटल रिसर्च प्लेटफॉर्म की डेटा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के आखिर तक भारत में 1.06 अरब एक्टिव मोबाइल कनेक्शन थे और कुल आबादी में से 70 प्रतिशत यूजर्स इंटरनेट यूज कर रहे थे।
ऐप्स डिलीट होने की वजह से कंपनियों का बिजनेस मॉडल पूरी तरह से चरमरा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर ऐप्स डाउनलोड करने के लिए फ्री में उपलब्ध होते हैं। वो विज्ञापन और पुश नोटिफिकेशन के जरिए यूजर्स को अपने प्रोडक्ट की तरफ आकर्षित करते हैं। यह यूजर और कंपनियों के बीच का डायरेक्ट जरिया बनता है।
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ऐप्स डिलीट होने की वजह से कंपनियों का बिजनेस मॉडल पूरी तरह से चरमरा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर ऐप्स डाउनलोड करने के लिए फ्री में उपलब्ध होते हैं। वो विज्ञापन और पुश नोटिफिकेशन के जरिए यूजर्स को अपने प्रोडक्ट की तरफ आकर्षित करते हैं। यह यूजर और कंपनियों के बीच का डायरेक्ट जरिया बनता है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एक यूजर किसी ऐप को 30 दिनों के भीतर ही अनइंस्टॉल या डिलीट कर देते हैं। जितनी तेजी से यहां यूजर ऐप को डाउनलोड करते हैं, उतनी ही तेजी से इसे डिलीट भी करते हैं। इनमें से 70 प्रतिशत ऐसे यूजर्स हैं, जो ऐप डाउनलोड करने के 30 दिनों के भीतर ही उसे अनइंस्टॉल कर देते हैं।
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इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एक यूजर किसी ऐप को 30 दिनों के भीतर ही अनइंस्टॉल या डिलीट कर देते हैं। जितनी तेजी से यहां यूजर ऐप को डाउनलोड करते हैं, उतनी ही तेजी से इसे डिलीट भी करते हैं। इनमें से 70 प्रतिशत ऐसे यूजर्स हैं, जो ऐप डाउनलोड करने के 30 दिनों के भीतर ही उसे अनइंस्टॉल कर देते हैं।
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