कच्छ की समुद्री सीमा के रास्ते लगभग 575 करोड़ रुपये की हेरोइन भारत में तस्करी करने के तीन अलग-अलग मामलों में भुज की विशेष NDPS कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने 18 पाकिस्तानी और 1 अफगानी नागरिक सहित कुल 19 ड्रग तस्करों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। तीनों मामलों में गुजरात ATS ने खुफिया सूचना के आधार पर जखौ के निकट कच्छ की समुद्री सीमा में विशेष अभियान चलाकर आरोपियों को भारी मात्रा में हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था।
2020 में 175 करोड़ की हेरोइन बरामद
6 जनवरी 2020 को ATS ने जखौ के निकट समुद्र में एक फिशिंग बोट से 175 करोड़ रुपये की हेरोइन के साथ भारत में घुसपैठ कर रहे 5 पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो जाने से उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई, जबकि शेष 4 आरोपियों को दोषी ठहराकर 20 वर्ष की सजा सुनाई गई।
2021 में 150 करोड़ की हेरोइन के साथ 8 पाकिस्तानी गिरफ्तार
14 अप्रैल 2021 को ATS ने जखौ के पास समुद्र से 30 किलो हेरोइन (अनुमानित कीमत 150 करोड़ रुपये) के साथ एक नाव पकड़ी थी। पाकिस्तान के हैदरी पोर्ट से हेरोइन लेकर आए 8 पाकिस्तानी नागरिकों को अदालत ने 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
2022 में 250 करोड़ की हेरोइन, अफगानी की भी संलिप्तता
8 अक्टूबर 2022 को ATS ने जखौ के निकट 50 किलो हेरोइन (कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये) के साथ 5 पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान एक अफगान नागरिक की संलिप्तता सामने आने पर उसे भी गिरफ्तार किया गया। इस मामले में कुल 7 आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
प्रत्येक आरोपी को 20 वर्ष की कैद और 2 लाख रुपये का जुर्माना
तीनों मामलों की सुनवाई भुज के तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष NDPS न्यायाधीश वी. ए. बुद्ध की अदालत में हुई। अदालत ने सभी 19 आरोपियों को NDPS Act की धारा 8(C) एवं 23(C) के तहत दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने दोनों धाराओं के तहत दी गई सजाएं अलग-अलग भुगतने का भी आदेश दिया।
'नशे का कारोबार देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा'
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि भारत के युवाओं को नशे की लत में धकेलने का प्रयास केवल सामान्य अपराध नहीं, बल्कि देश के सामाजिक और राष्ट्रीय ढांचे को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश है। ऐसे अपराध देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे आरोपियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
तीनों मामलों में सरकार की ओर से मुख्य जिला सरकारी वकील एच. बी. जाडेजा ने प्रभावी पैरवी की। उल्लेखनीय है कि जांच के दौरान गिरफ्तार एक भारतीय सहित दो आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया।
पहले मामले में दोषी
अदालत ने इस्माइल मोहम्मद जाम (50), अनीश ईशा भाटी (30), अबूबकर हसम कुंगरा (70) और अशर्रफ उस्मान भाटी (42) को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। एक आरोपी की मृत्यु होने के कारण उसके विरुद्ध मुकदमा समाप्त कर दिया गया।
दूसरे मामले में दोषी
अदालत ने मुर्तजा यामीन सिंधी (35), यामीन उमर सिंधी (65), मुस्तफा यामीन सिंधी (33), नसरुल्ला यामीन सिंधी (28), हुसैन इब्राहिम सिंधी (62), सालेमामद अब्दुल्ला सिंधी (70), मोहम्मद यासीन मोहम्मद उर्स मुल्ला (39) और रफीक अहमद उस्मानअली मुल्ला (62) को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
तीसरे मामले में दोषी
इस मामले में अदालत ने अली मोहम्मद बच्चन मुल्ला (40), ममताज हारून मुल्ला (30), शेर मोहम्मद बशरिया बड (40), मोतिया इदरीश मुल्ला (50), इब्राहिम यूसुफ समेजा (68), जाहिद अब्दुल्ला मुल्ला (22) तथा अफगानिस्तान के हेकमतुल्लाह नुरुल्लाह को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
रिपोर्ट- नीतेश गोर, कच्छ
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