Monday, March 16, 2026
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Teesta Sitalvad Case: गुजरात की सेशन कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ और श्रीकुमार की जमानत याचिका खारिज की

Edited By: Pankaj Yadav Published : Jul 30, 2022 08:41 pm IST, Updated : Jul 30, 2022 08:41 pm IST

Teesta Sitalvad Case: सेशन कोर्ट ने शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आर.बी.श्रीकुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया। इन दोनों को 2002 के दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

Teesta Seetalvad and RB ShriKumar- India TV Hindi
Teesta Seetalvad and RB ShriKumar

Highlights

  • तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व DGP की जमानत याचिका खारिज
  • कोर्ट ने कहा -दोनों ने गुजरात को बदनाम करने की साजीश रची थी

Teesta Sitalvad Case: सेशन कोर्ट ने शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आर.बी.श्रीकुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया। इन दोनों को 2002 के दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के लिए गिरफ्तार किया गया है। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश डी.डी.ठक्कर ने इन दोनों को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि आरोपियों का उद्देश्य गुजरात सरकार को ‘‘अस्थिर करना’’ और राज्य को बदनाम करना था। मामले के तीसरे आरोपी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया था। भट्ट पहले से ही एक अन्य मामले में जेल में थे, जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था। 

गुजरात को बदनाम करने की साजीश थी -कोर्ट

सत्र न्यायालय ने आदेश में कहा, ‘‘भट्ट पहले से ही एक अन्य मामले में जेल में थे, जब उसे गिरफ्तार किया गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों का इरादा तत्कालीन सरकार पर गोधरा दंगों को प्रायोजित करने का आरोप लगाने के लिए झूठे दस्तावेजों का उपयोग करके सरकार को अस्थिर करना और देश और विदेश में गुजरात की छवि खराब करना था। अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों आरोपियों की अपने गुप्त उद्देश्यों के साथ-साथ राजनीतिक आकांक्षाओं के लिए गुजरात राज्य को बदनाम करने में सक्रिय रूप से दिलचस्पी थी और उन्होंने एक राजनीतिक धड़े के साथ-साथ अन्य देशों से व्यक्तिगत लक्ष्य और मौद्रिक लाभ प्राप्त करने के लिए ऐसा किया।

सीतलवाड़ को 30 लाख रुपए का भुगतान किया गया -SIT

दोनों को अहमदाबाद शहर की क्राइम ब्रांच ने IPC की धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 194 (दोषी साबित करने के इरादे से झूठे सबूत देना या गढ़ना) के तहत गिरफ्तार किया था। जमानत का विरोध करते हुए, मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने एक गवाह के बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि आरोपी तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार को अस्थिर करने के लिए कांग्रेस के दिवंगत नेता अहमद पटेल के इशारे पर की गई साजिश का हिस्सा थे। SIT ने दावा किया कि 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड के तुरंत बाद पटेल के कहने पर सीतलवाड़ को 30 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। SIT ने दावा किया कि श्रीकुमार एक ‘‘असंतुष्ट सरकारी अधिकारी’ थे, जिन्होंने ‘‘पूरे गुजरात राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों, नौकरशाही और पुलिस प्रशासन को गुप्त उद्देश्यों के लिए बदनाम करने के वास्ते प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।’’ 

ये था मामला

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 2002 के गुजरात दंगा मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 63 अन्य लोगों को SIT द्वारा क्लीन चिट दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका 24 जून को खारिज कर दी थी। यह याचिका गुजरात दंगों में मारे गए कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने दायर की थी। एहसान जाफरी 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में मारे गए 68 लोगों में शामिल थे। इससे एक दिन पहले गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगा दी गई थी, जिसमें 59 लोग मारे गए थे। इन घटनाओं के बाद ही गुजरात में दंगे भड़क गए थे। इन दंगों में एक हजार से अधिक लोग मारे गए थे।

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