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गुजरात: 67 नगर पालिकाओं और तीन तालुका पंचायतों में चुनाव, कुल 191 सीटों पर मतदान जारी

Edited By: Shakti Singh Published : Feb 16, 2025 11:16 am IST, Updated : Feb 16, 2025 11:16 am IST

विभिन्न स्थानीय निकायों की 213 सीटों पर मतदान नहीं होगा। इन सीटों पर सत्तारूढ़ भाजपा का केवल एक उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में बचा है, अन्य सभी ने अपना नामांकन वापस ले लिया है।

Voting- India TV Hindi
Image Source : PTI मतदान (फाइल फोटो)

गुजरात में कुल 191 सीटों पर स्थानीय चुनाव हो रहे हैं। इनमें जूनागढ़ सहित कुल 66 नगर पालिका शामिल हैं। इसके अलावा गांधीनगर सहित तीन तालुका पंचायतों के चुनाव के लिए रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान हो रहा है। बोताड और वांकानेर नगर पालिकाओं और राज्य में विभिन्न कारणों से रिक्त पड़े अन्य स्थानीय और शहरी निकायों की 124 सीटों के लिए भी एक साथ उपचुनाव हो रहे हैं। स्थानीय निकायों के लिए यह पहला चुनावी मुकाबला है, जहां 2023 में गुजरात सरकार के फैसले के अनुसार पंचायतों, नगर पालिकाओं और नागरिक निगमों में 27 प्रतिशत सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित की गई हैं।

कुल 5,084 उम्मीदवार मैदान में हैं और इन स्थानीय निकाय चुनावों में 38 लाख से अधिक लोग वोट डालने के पात्र हैं। राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चलेगा।

मतगणना 18 फरवरी को होगी।

213 सीटों पर नहीं हो रहा मतदान

विभिन्न स्थानीय निकायों की 213 सीटों पर मतदान नहीं होगा। इन सीटों पर सत्तारूढ़ भाजपा का केवल एक उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में बचा है, अन्य सभी ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इनमें जूनागढ़ नगर निगम के 15 वार्डों की 60 सीटों में से आठ सीटें शामिल हैं, जहां प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अन्य उम्मीदवारों के चुनाव मैदान से हटने के बाद केवल भाजपा के उम्मीदवार ही मैदान में बचे हैं। भाजपा ने कहा है कि भचाऊ, जाफराबाद, बंटवा और हलोल की चार नगर पालिकाओं में उसकी जीत तय है। इन नगर पालिकाओं में निर्विरोध चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों की संख्या बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है।

बीजेपी ने खारिज किया कांग्रेस का दावा

कांग्रेस ने दावा किया कि उसके उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने की धमकी दी गई थी, जिसका भाजपा ने खंडन किया। गुजरात सरकार ने अगस्त 2023 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) के.एस. झावेरी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर नगर निगमों, पंचायतों और नगर पालिकाओं में ओबीसी कोटा सीमा को पिछले 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानीय निकायों में मौजूदा आरक्षण क्रमशः 14 प्रतिशत और 7 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहा, जिससे कुल कोटा 50 प्रतिशत की सीमा के अंतर्गत बना रहा।

झावेरी आयोग की स्थापना जुलाई 2022 में की गई थी, जब सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि ओबीसी के लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए। पैनल ने स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति और निहितार्थों के बारे में डेटा एकत्र और विश्लेषण किया, जो स्थानीय स्वशासन के संस्थानों के चुनावों में ओबीसी कोटा तय करने के लिए आवश्यक था। (इनपुट-पीटीआई)

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