आजकल लोगों में एस्थेटिक चीजों को लेकर काफी क्रेज है। हैंडलूम आइटम और हस्तशिल्प की कलाकारियों को खरीदना और उन्हें देखने लोगों को पसंद आने लगा है। अगर आपको भी हैंडीक्राफ्ट की चीजों का शौक है तो आपके लिए दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में पहली बार कारीगर बाजार लगने वाला है। यहां आप भारत की जीवंत हस्तशिल्प परंपराओं का भव्यता देख पाएंगे। आप यहां से एक से एक बेहतरीन क्राफ्ट, कारीगरी और उसे बनते हुए लाइव देख पाएंगे।
इस बाजार का आयोजन 20 फरवरी से 1 मार्च तक किया जाएगा। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कारीगर बाजार आयोजित होगा। ये बाजार प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहेगा। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के गेट नंबर 12 से इस बाजार में जाने की एंट्री होगी और एंट्री फीस 50 रुपए है। आप मेट्रो से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके नजदीक मेट्रो स्टेशन का नाम जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम है। आप बस या कार से भी पहुंच सकते हैं।
आपको बता दें इस बाजार में देश के अलग-अलग राज्यों से करीब 200 से ज्यादा कारीगर अपनी कला को प्रदर्शित करेंगे। जिसमें से कई राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, पारंपरिक शिल्प विशेषज्ञ और महिला शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी। सभी स्टॉल पर आपको राज्य और पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कौशल, क्षेत्रीय पहचान और हस्तनिर्माण की चीजें देखने को मिलेंगी। आप यहां से खूबसूरत होम डेकोर आइटम, क्रॉकरी, पेंटिंग, हैंडलूम के कपड़े खरीद सकते हैं।
अगर आपको साड़ियों के खास कलेक्शन का शौक है तो यहां से जामदानी, इकत, अजरख, चंदेरी, महेश्वरी, फुलकारी, चिकनकारी, जरी-जर्दोजी की साड़ियां और सूट खरीद सकते हैं। इसके अलावा लोक एवं जनजातीय कला, पर्यावरण-अनुकूल शिल्प, आभूषण, घरों को सजाने वाली सामग्री भी मिलेगी।
अगर आप खाने पीने के शौकीन हैं या बाजार में घूमते हुए कुछ स्वादिष्ट और पारंपरिक खाने का स्वाद लेना है तो उसकी व्यवस्था भी की गई है। ज्यादातर स्टॉल्स पर आपको राज्य की लोकप्रिय चीजों का जायका भी चखने को मिल जाएगा। इस दौरान आपको लोक संस्कृति की झलक नृत्य और नाटकों के जरिए दिखाई जाएगी, जिसमें दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे कई बड़े राज्य शामिल होंगे।
इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण कारीगर एक्सपीरियंस सेंटर होगा। जहां लोग कारीगरों से सीधे बात कर पाएंगे और लाइव डेमोंस्ट्रेशन और वर्कशॉप में भाग ले सकेंगे। इसमें ब्लॉक प्रिंटिंग, पॉटरी, पटचित्र पेंटिंग, चन्नापटना खिलौना निर्माण, लाख की चूड़ी बनाना, सबाई घास बुनाई सहित अनेक पारंपरिक शिल्प प्रक्रियाओं का अनुभव कराया जाएगा।
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