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हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड के दो अधिकारी गिरफ्तार, 50 करोड़ रुपये गबन के मामले में CBI ने कसा शिकंजा

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Jul 08, 2026 10:33 pm IST,  Updated : Jul 08, 2026 10:46 pm IST

हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड के लेखा अधिकारी जुगल किशोर और संविदा पर कार्यरत लेखाकार अमित कुमार को सीबीआई गिरफ्तार किया है। हरियाणा सरकार की सिफारिश पर यह मामला सीबीआई ने अपने हाथ में लिया था।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : ANI

सीबीआई ने हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड के दो अधिकारियों को बोर्ड के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते से 50 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि CBI ने हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड के दो अधिकारियों को IDFC फर्स्ट बैंक में मौजूद बोर्ड के अकाउंट से 50 करोड़ रुपये के कथित गबन के आरोप में गिरफ्तार किया है।

 IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले जुड़ा है मामला

सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि यह कथित धोखाधड़ी चंडीगढ़ में IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 ब्रांच में हुए एक बड़े घोटाले का हिस्सा है। इस घोटाले में राज्य सरकार के आठ विभागों के 504 करोड़ रुपये के फंड को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए निकाल लिया गया और बाद में शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के ज़रिए इधर-उधर कर दिया गया।

प्रवक्ता ने बताया कि एजेंसी ने इस कथित गबन के सिलसिले में अकाउंट्स ऑफिसर जुगल किशोर और अकाउंटेंट अमित कुमार (कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले) को गिरफ्तार किया है। यह मामला हरियाणा सरकार के कहने पर CBI को सौंपा गया था। जांच में पता चला कि HLWB के अकाउंट से 50 करोड़ रुपये के सरकारी फंड का धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए गबन किया गया और इसे कैपको फिनटेक सर्विसेज, SRR प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी शेल कंपनियों में भेज दिया गया। 

सीबीआई ने दी जानकारी

सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि यह कथित धोखाधड़ी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-32 शाखा में हुए एक बड़े घोटाले से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि इस घोटाले में हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़े 504 करोड़ रुपये के सरकारी धन को फर्जी सावधि जमा और फर्जी लेनदेन के जरिए निकालकर फर्जी कंपनियों के माध्यम से गबन कर लिया गया।

जांच में पता चला कि ₹50 करोड़ का सरकारी फंड गलत तरीके से अनऑथराइज्ड डेबिट ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए निकाला गया और शेल कंपनियों (जैसे कैपको फिनटेक सर्विसेज, SRR प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स) में ट्रांसफर कर दिया गया। एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ ठोस सबूत मिले, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

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