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युवाओं में तेजी से बढ़ रही है आर्थराइटिस की बीमारी, एक्सपर्ट से जानें जवानी में ही घुटनों से क्यों निकलने लगा है दम

 Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
 Published : Nov 01, 2025 09:28 pm IST,  Updated : Nov 01, 2025 09:28 pm IST

आजकल की बदलती जीवनशैली में कम उम्र में ही गठिया (आर्थराइटिस) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है इस बारे में बता रहे हैं एक्सपर्ट

 युवा वयस्कों में गठिया के क्या कारण हैं?- India TV Hindi
युवा वयस्कों में गठिया के क्या कारण हैं? Image Source : FREEPIK

आजकल के बदलते परिवेश में आर्थराइटिस सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही गई है। अब, युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अक्सर युवा पिढी जोडों में हल्की अकडन या सूजन को नजरअंदाज कर देते हैं, समय पर निदान और इलाज न करने के कारण उन्हें लगातार दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई होने लगती हैं। मुंबई स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमित ग्रोवर कहते हैं कि आर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें जोड़ों में सूजन होती है, जिससे दर्द, सूजन और अकड़न महसूस होती है। 20 से 40 वर्ष की आयु वर्ग में आर्थराइटिस के मामलों में लगभग 40% की वृद्धि देखी जा रही है। हर महीने आने वाले मरीजों में से 10 में से 4 लोग जोड़ों के दर्द और अकड़न की शिकायत लेकर आते हैं। ऐसे में जानते हैं इसके पीछे वजह क्या है और इसका इलाज़ क्या है?

आर्थराइटिस के मुख्य वजह क्या है?

बैठे-बैठे की जीवनशैली, तनाव, असंतुलित दिनचर्या और आनुवंशिक कारण इसके प्रमुख कारण हैं। लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करना, व्यायाम की कमी, गलत बैठने की आदत, चोट लगना, मोटापा, ऑटोइम्यून रोग, पारिवारिक इतिहास और तनाव है। इसके लक्षणों में जोड़ों में दर्द, सूजन, गर्माहट, लचीलापन कम होना और थकान शामिल हैं। अगर इन लक्षणों को अनदेखा किया गया, तो यह जोड़ों में विकृति, दर्द और विकलांगता का कारण बन सकता है।

क्या हैं बचाव के उपाय?

अगर आर्थराइटिस को शुरू में पहचान लिया जाए तो सूजन को नियंत्रित कर, दर्द कम और लंबे समय के नुकसान से बचाव किया जा सकता है। समय पर की गई फिजियोथेरेपी, बायोलॉजिक थेरेपी और दवाइयां मरीजों को लंबे समय तक राहत देते हैं और विकलांगता से बचाते हैं। इसके साथ ही नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण, तनाव में कमी और डॉक्टर की सलाह से जोड़ों की सेहत बरकरार रखी जा सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर विशेषज्ञ से जांच कराएं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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