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National Epilepsy Awareness Day: दिमाग के दुश्मनों को हराने के लिए अपनाएं थिंक वीक फॉर्मूला, सुधरने लगेगी मेंटल हेल्थ

 Written By: Sajid Khan Alvi, Edited By: Vanshika Saxena
 Published : Aug 03, 2025 11:06 am IST,  Updated : Aug 03, 2025 11:06 am IST

National Epilepsy Awareness Day: क्या आप थिंक वीक फॉर्मूला के बारे में जानते हैं? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस फॉर्मूले की मदद से आप अपनी मेंटल हेल्थ को काफी हद तक मजबूत बना सकते हैं।

नेशनल एपिलेप्सी अवेयरनेस डे- India TV Hindi
नेशनल एपिलेप्सी अवेयरनेस डे Image Source : FREEPIK

सीजन का पहला स्नोफॉल और कश्मीर बर्फ की चादर में लिपट गया है। गुरेज घाटी, बांदीपुरा, सोनमर्ग, गुलमर्ग, सारे इलाकों की खूबसूरती में बर्फबारी ने चार चांद लगा दिए हैं। कई लोगों ने 'ट्रैवलिंग थेरेपी' के लिए कश्मीर जाने का प्लान बनाना शुरू कर दिया होगा। ट्रैवलिंग थेरेपी दिमाग को शांत करने का नया फॉर्मूला है। दरअसल, दौड़ती-भागती जिंदगी में सब इतने मशगूल हो गए हैं कि अपने लिए वक्त ही नहीं निकाल पाते। रोज सुबह उठो, तैयार हो और काम पर निकल जाओ। एक वक्त के बाद सेम रूटीन से लाइफ बोरिंग हो जाती है। इसलिए मौका मिलते ही लोग बैग पैक कर घूमने निकल जाते हैं। वैसे इन दिनों घूमने के लिए हॉट डेस्टिनेशन हिल स्टेशन ही होते हैं क्योंकि ठंड बढ़ते ही मैदानी इलाके में तो वैसे ही पॉल्यूशन का बुरा हाल हो जाता हैं। ऐसी कंडीशन में बर्फ से ढके पहाड़ में लोगों को जन्नत नजर आती है।

वक्त-वक्त पर ब्रेक लेकर कुदरत के करीब जाना जरूरी है, नहीं तो लगातार काम से शरीर थकने लगता है। अगर आप भी ऐसे ही थका-थका महसूस करते हैं, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। देर-सबेर इसका असर आपके दिमाग पर पड़ सकता है। स्ट्रेस, हॉर्मोनल चेंज, नींद की कमी से दिमाग में केमिकल लोचा हो सकता है और लोग न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर की गिरफ्त में आ जाते हैं। ऐसा ही एक डिसऑर्डर मिर्गी यानी एपिलेप्सी भी है। लोग इसका इलाज करने के बदले इसे छुपाने में ज्यादा एनर्जी लगाते हैं जिसकी वजह से कई बार हालात और गंभीर बन जाते हैं।

नेशनल एपिलेप्सी अवेयरनेस डे

आज के दिन को नेशनल एपिलेप्सी अवेयरनेस डे के रूप में मनाया जाता है। भारत में तकरीबन 1 करोड़ लोगों को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। डब्लूएचओ के मुताबिक पूरी दुनिया में 5 करोड़ लोग एपिलेप्सी के शिकार हैं इसलिए एपिलेप्सी अवेयरनेस की बेहद जरूरत है। आइए इस अवेयरनेस को और बढ़ाते हैं और योगगुरू से दिमाग को हर सिचुएशन में कैसे स्टेबल और शांत रखें, इसके उपाय जानते हैं।

थिंक वीक फॉर्मूला

थिंक वीक फॉर्मूले का इस्तेमाल लगातार 18 साल तक दुनिया के सबसे अमीर आदमी रहे माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स करते थे। बिल गेट्स साल में दो बार अकेले ट्रिप पर जाते थे। मोबाइल-इंटरनेट से दूर सिर्फ ढेर सारी किताबें ले जाते थे और सोचते, पढ़ते, लिखते रहते थे और नए आइडियाज पर काम करते थे। ऐसी ही एक ट्रिप पर उन्हें सर्च इंजन इंटरनेट एक्सप्लोरर का आइडिया भी आया था। अमेरिका में न्यूरो साइंटिस्ट जोसेफ जेबेली ने अपनी लेटेस्ट रिसर्च में कहा है कि अगर वाकई स्मार्ट बनना है तो दुनिया की भागदौड़ से दूर दिमाग को थोड़ा अकेले में भटकने दीजिए। दुनिया के सबसे इंटेलीजेंट लोगों में शामिल बिल गेट्स, लियोनार्डो द विंची की तो यही आदत थी, सॉलीट्यूड यानी कुछ वक्त अकेले रहना। ये आदत न सिर्फ उन्हें क्रिएटिव बनाती थी बल्कि रोजमर्रा के तनाव से भी छुटकारा दिलाती थी।

क्या कहती है स्टडी?

स्ट्रेस की बात की जाए तो फिर थिंक वीक फॉर्मूला इस दौर की सबसे बड़ी जरूरत बन सकता है क्योंकि एक स्टडी की मानें तो काम के बोझ से लोग बर्नआउट हो रहे हैं। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि दुनिया में 70% लोग ऐसे हैं जो हमेशा टेंशन में रहते हैं। इसका असर उनके दिमाग पर पड़ता है। ऐसे ही एक डिसऑर्डर मिर्गी यानी एपिलेप्सी के लक्षणों की बात की जाए तो मरीज के हाथ-पैरों में झटके आ सकते हैं, पेशेंट अचानक खड़े-खड़े गिर सकता है, हो सकता है उसे कुछ वक्त के लिए कुछ भी याद न रहे, चक्कर आएं, बॉडी कांपने लगे, ये सब एपिलेप्सी अटैक के सिग्नल हैं। आइए ब्रेन के इस केमिकल लोचे के मरीजों की बढ़ती स्पीड पर ब्रेक लगाते हैं।

अकेलेपन के फायदे

कुछ वक्त अकेले बिताने से दिमाग पर से बोझ घटता है, तरोताजा महसूस होता है और रोजमर्रा के तनाव से छुटकारा मिलता है। आइए एपिलेप्सी के कुछ कारणों के बारे में भी जानते हैं। ब्रेन ट्यूमर, सिर में चोट, ब्रेन स्ट्रोक, मेनिन्जाइटिस, नर्वस सिस्टम की कमजोरी, डिप्रेशन, नशे की आदत जैसे फैक्टर्स एपिलेप्सी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। एपिलेप्सी में ब्रेन के न्यूरॉन्स में गड़बड़ी हो जाती है।

ब्रेन को हेल्दी कैसे बनाएं?

ब्रेन हेल्थ के लिए एक्सरसाइज, बैलेंस डाइट, तनाव से दूरी, म्यूजिक और अच्छी नींद बेहद जरूरी है। अखरोट, बादाम, काजू, अलसी, पंपकिन सीड्स आपकी ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। आप डार्क चॉकलेट, ब्लू बेरी, ब्रोकली, संतरा, गाय का घी भी कंज्यूम कर सकते हैं। दूध, हल्दी और शिलाजीत भी दिमाग की सेहत को मजबूत बनाने में कारगर साबित हो सकते हैं। ब्रेन हेल्थ के लिए एलोवेरा, गिलोय और अश्वगंधा को भी डाइट प्लान में शामिल किया जा सकता है। अंकुरित अन्न, हरी सब्जियां और लौकी भी फायदेमंद साबित हो सकती है। इसके अलावा दूध में बादाम रोगन डालकर पीना, बादाम रोगन नाक में डालना और बादाम-अखरोट को पीसकर खाना भी ब्रेन हेल्थ को सुधारने का काम कर सकता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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