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‘भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता, अवैध घुसपैठियों को हर हाल में वापस जाना होगा’

केंद्र और राज्य सरकार ने एनआरसी में शामिल नागरिकों के नमूने के सत्यापन का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के साथ लगते जिलों में स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण लाखों लोगों को गलत रूप से असम एनआरसी में शामिल किया गया।

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Jul 19, 2019 11:58 am IST, Updated : Jul 19, 2019 11:58 am IST
‘भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता, अवैध घुसपैठियों को हर हाल में वापस जाना होगा’- India TV Hindi
‘भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता, अवैध घुसपैठियों को हर हाल में वापस जाना होगा’

नयी दिल्ली: केंद्र और असम सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का रुख कर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को अंतिम रूप देने के लिए तय 31 जुलाई की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। केंद्र ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता।

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केंद्र और राज्य सरकार ने एनआरसी में शामिल नागरिकों के नमूने के सत्यापन का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के साथ लगते जिलों में स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण लाखों लोगों को गलत रूप से असम एनआरसी में शामिल किया गया।

केंद्र सरकार ने कहा कि लोगों की पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन करना अभी बाकी है। एनआरसी मामले में केंद्र सरकार ने कहा कि कोऑर्डिनेटर ने इस मामले में अच्छा काम किया है लेकिन हम लाखों लोगों के मामले में काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि 31 जुलाई को सप्लिमेंटरी लिस्ट जारी कर देंगे, लेकिन फाइनल लिस्ट जारी करने में अभी और समय लगेगा। असम में अभी बाढ़ भी आई हुई है।

असम के लिए एनआरसी का पहला मसौदा शीर्ष न्यायालय के निर्देश पर 31 दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 की दरम्यिानी रात को प्रकाशित हुआ था। उस समय 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम इनमें शामिल किए गए थे। 20वीं सदी की शुरुआत में बांग्लादेश से असम में बड़ी संख्या में लोग आए। असम इकलौता राज्य है जहां एनआरसी है जिसे सबसे पहले 1951 में तैयार किया गया था।

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