इन दिनों रमज़ान चल रहे हैं यानी ये महीना रमज़ान का है जिसमें मुसलमान तीस दिन तक रोज़ा रखते हैं और फिर ईद मनाते हैं। लेकिन पिछले कुछ दशकों से एक बहस चली आ रही है कि सही शब्द क्या है...रमज़ान या रमदान...?
माना जाता है कि रमज़ान शब्द फ़ारसी भाषा की देन है और दुनिया के इस हिस्से में ज़्यादातर मुसलमान रमज़ान ही कहते आए हैं। इस बीच रमज़ान अचानक बदलकर रमदान हो गया जोकि अरबी भाषा का शब्द है। सैकड़ों बरस पहले अरब में द का उच्चारण जिस तरह से किया जाता था वैसा उच्चारण न तो हिंदी में होता है और न ही अंग्रेज़ी में। भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमान इसे ‘द’ कहते हैं तो पश्चिमी देशों के मुसलमान ‘द’ को ‘ड’ कहते हैं।
'अरबी भाषा में 'ज़्वाद' अक्षर का स्वर अंग्रेज़ी के 'ज़ेड' के बजाए 'डीएच' की संयुक्त ध्वनित होता है इसीलिए अरबी में इसे रमदान कहते हैं जबकि उर्दू में आमतौर पर इसे रमज़ान कहते हैं।
इसके अलावा इसका एक कारण भारत और सऊदी अरब से बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंध भी है। भारत से अब काफी संख्या में मुसलमान अरब जा रहे हैं और वहां से लौटने के बाद वहां की बोलचाल, वेशभूषा और वहां का रहन-सहन भारत में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।
क़ुरान जिस उच्चारण के साथ उस समय पढ़ी जाती रही होगी वैसी अब नहीं पढ़ी जाती
कुछ शोधपत्रों से पता चलता है कि जब कुरान लिखी गई थी उस समय कई शब्दों का उच्चारण आज से एकदम अलग था। इस बात के कई उदाहरण मिल जाएंगे कि कैसे समय के साथ शब्दों, अक्षरों और उच्चारण में बदलाव आते रहे हैं। क़ुरान जिस उच्चारण के साथ उस समय पढ़ी जाती रही होगी वैसी अब नहीं पढ़ी जाती।
भारतीय इस्लाम मूल रूप से अरब के बजाय मध्य एशिया और ईरान से आया है। भारत में एक लंबे समय तक फ़ारसी भाषा का दबदबा रहा था और यही वजह है कि भारतीय इस्लाम की भाषा पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। क़ुरान में नमाज़ के लिए अरबी शब्द 'सालाह' है न कि नमाज़ लेकिन सालाह को फ़ारसी ने नमाज़ बना दिया। इसी तरह रोज़ा को अरबी में 'साउम' कहते हैं लेकिन फ़ारसी में ये रोज़ा हो गया।
फिर ये बदलाव क्यों...? जाने अगली स्लािड में