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कई बार अस्वीकृत करने के बाद JNU में योग के पाठ्यक्रम की मिली मंजूरी

 Written By: Bhasha
 Published : Jun 18, 2017 02:37 pm IST,  Updated : Jun 18, 2017 02:37 pm IST

कई बार अस्वीकृत किए जाने और छात्रों तथा शिक्षकों के एक वर्ग द्वारा आपत्ति उठाए जाने के बाद योग में लघु अवधि के पाठ्यक्रम को शुरू करने के जेएनयू के प्रस्ताव को विश्वविद्यालय की फैसला लेने वाली शीर्ष परिषद ने अंतत: मंजूरी दे दी।

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नई दिल्ली: कई बार अस्वीकृत किए जाने और छात्रों तथा शिक्षकों के एक वर्ग द्वारा आपत्ति उठाए जाने के बाद योग में लघु अवधि के पाठ्यक्रम को शुरू करने के जेएनयू के प्रस्ताव को विश्वविद्यालय की फैसला लेने वाली शीर्ष परिषद ने अंतत: मंजूरी दे दी। (भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने की उद्धव ठाकरे से मुलाकात)

विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, इस बाबत गुरुवार को अकादमिक परिषद की बैठक में फैसला लिया गया। इस पाठ्यक्रम पर खूब बहस हो चुकी है और अब इसे मंजूरी देते हुए योग दिवस 21 जून मनाना एक बहुत ही बढ़िया विचार होगा।

भारतीय संस्कृति तथा योग पर लघु अवधि के तीन पाठ्यक्रम शुरू करने का विचार सबसे पहले वर्ष 2015 में आया था। संघ जैसे दक्षिणपंथी संगठन भारत की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने तथा सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की खातिर शैक्षणिक संस्थानों में संस्कृति के प्रचार पर जोर दे रहे थे।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा विविद्यालय अनुदान आयोग से कई बार संपर्क संवाद के बाद जेएनयू ने तीन पाठ्यक्रमों का मसौदा विश्व विद्यालय के विभिन्न स्कूलों तथा विभागों में उनकी राय जानने के लिए भेजा था। हालांकि इस प्रस्ताव को नवंबर 2015 में अकादमिक परिषद ने अस्वीकार कर दिया था। लेकिन पिछले वर्ष मई में विश्व विद्यालय ने इस पर पुन: विचार करने का सोचा।

पिछले वर्ष अक्तूबर में परिषद ने इसे फिर अस्वीकार कर दिया। फिर योग दर्शन में पाठ्यक्रम को स्वीकृति दे दी गई लेकिन भारतीय संस्कृति पर जिन दो पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव है उनके बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।

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