चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने आज एक अहम आदेश देते हुए तमिलनाडु सरकार को सूखा प्रभावित किसानों के कर्ज माफ करने और सहकारी समितियों तथा बैंकों को उनसे बकाया कर्ज वसूलने से रोकने के निर्देश दिये।
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अदालत ने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति बहुत गंभीर है और वह सूखे से प्रभावित रहे इस वर्ष में अकेले ही कर्ज का बोझ उठा रहा है और सूखे के कारण किसानों ने आत्महत्या की। अदालत ने सुझाव दिया कि केन्द्र को इस मुश्किल समय के दौरान तमिलनाडु की वित्तीय मदद करने के लिए आगे आना चाहिये।
न्यायमूर्ति एस नागमुथू और न्यायमूर्ति एम वी मुरलीधरन की खंडपीठ ने नेशनलिस्ट साउथ इंडियन रीवर इंटरलिंकिंग एग्रीकल्चरिस्ट एसोसिएशन की याचिका पर सुनवायी करते हुए कर्ज माफ करने का आदेश दिया।
अदालत ने सहकारी, खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण विभाग तथा सहकारी समितियों के पंजीयक को 2016 के दो सरकारी आदेशों के तहत सभी किसानों के फसल कर्ज माफ करने की योजना को बढ़ाने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, हम जानते हैं कि राज्य की वित्तीय स्थिति गंभीर है। मुख्य सचिव ने महाधिवक्ता को लिखे पत्र में ही यही बात दोहरायी है। सरकार अकेले अपने कंधो पर 5,780 करोड़ रुपये का बोझ उठा रही है और यह उसके लिए 1,980.33 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ होगा।
अदालत ने कहा कि इस मुश्किल समय में केन्द्र सरकार मूक दर्शक बने नहीं रह सकती और उसे इस बोझ को साझा करने के लिए राज्य सरकार की मदद के लिए आगे आना चाहिये।