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नितिन गडकरी ने गंगा नदी की सफाई का ब्लूप्रिंट तैयार किया

Edited by: IndiaTV Hindi Desk Published : Sep 08, 2017 10:53 pm IST, Updated : Sep 08, 2017 10:53 pm IST

अगले तीन महीने में उन 10 शहरों में गंगा नदी की सफाई का काम शुरु हो जाएगा जहां गंगा नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित है और जहां से सबसे ज्यादा गंदगी गंगा नदीं में छोड़ी जाती है।

Nitin Gadkari- India TV Hindi
Nitin Gadkari

नई दिल्ली: जल संसाधन मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद नितिन गडकरी ने गंगा नदी की सफाई का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। अगले तीन महीने में उन 10 शहरों में गंगा नदी की सफाई का काम शुरु हो जाएगा जहां गंगा नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित है और जहां से सबसे ज्यादा गंदगी गंगा नदीं में छोड़ी जाती है। इसमें फोकस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर होगा। इन 10 शहरों में -कोलकात्ता, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद, पटना, हावड़ा, हरिद्वार और भागलपुर शामिल है। यही10 शहर गंगा में 70% प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। 

सूत्रों के मुताबिक अगले 15 दिन में खुद नितिन गडकरी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ कानपुर में गंगा किनारे की गंदगी और गंगा में गिरने वाले नालों का 'ऑन स्पॉट' जायजा लेंगे। दरअसल कानपुर में चमड़े की कई फैक्ट्रियां हैं जिनसे निकलने केमिकल वाला पानी गंगा नदीं में गिरता है। पर जिस अनुपात में कानपुर में गंगा नदी प्रदूषित होती है, उस अनुपात में गंदे साफ पानी को साफ करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है। इसके साथ ही शीशामऊ कानपुर का सबसे बड़ा नाला है जिससे रोज लाखों लीटर गंदा पानी गंगा नदी में गिरता है। कानपुर की पूरी गंदगी को यही नाला लाकर गंगा नदी में मिलाता है। लिहाजा इस नाले का मार्ग परिवर्तन ( divert) करने के लिेए काम तुरंत प्रभाव से शुरु करने का आदेश हो चुका है। 

गौरतलब है कि मंत्रालय का प्रभार संभालते ही गडकरी ने पहली ही बैठक में नमामि गंगे परियोजना और प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की थी। बैठक में गडकरी ने साफ कर दिया था कि केंद्र सरकार का काम सिर्फ पैसा देना नहीं है बल्कि जिम्मेदारी लेना भी है। दरअसल केंद्र की सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने वादा किया कि गंगा नदी को साफ करेगी और इसके लिए नमामि गंगे परियोजना की शुरुआत की गई। योजना के तीन साल पूरा होने के बाद भी गंगा की सूरत और पानी जब नहीं बदला तो पीएम मोदी ने उमा भारती को हटाकर मंत्रालय का कमान नितिन गडकरी दी जो तय समय में काम पूरा करने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन अब लोकसभा चुनाव में दो साल से कम वक्त बचा है, ऐसे में नितिन गडकरी के लिए भी राह आसान नहीं है। 

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