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चीन और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों पर कैसे भारी पड़ेगा राफेल? ये रही पूरी डिटेल

आसमानी जंग पूरी तरह मिसाइलों की रेंज और दुश्मन के विमान की ट्रैकिंग पर निर्भर करती है इसीलिये राफेल का वेपन पैकेज पाकिस्तान पर भारी है। 

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: July 29, 2020 18:37 IST
चीन और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों पर कैसे भारी पड़ेगा राफेल? ये रही पूरी डिटेल- India TV Hindi
Image Source : INDIAN AIR FORCE/TWITTER चीन और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों पर कैसे भारी पड़ेगा राफेल? ये रही पूरी डिटेल

नई दिल्ली: राफेल विमानों का भारत की धरती पर आगमन हो चुका है और इसके बारे में कहा जाता रहा है कि यह विमान भारतीय वायुसेना की एयर पावर को कई गुना बढ़ा देगा। ऐसा कैसे होगा इसे समझने की ज़रूरत है। राफेल को लेकर सबसे बड़ा और सबसे अहम सवाल है कि अगर इसका सामना पाकिस्तान के सबसे मज़बूत फाइटर F-16 से हुआ या फिर राफेल का मुक़ाबला चीन के सबसे ख़तरनाक फाइटर J-20 से हुआ तो कौन जीतेगा? आइये आपको बताते हैं कि आख़िर वो क्या वजह है कि अगर राफेल का पाकिस्तान और चीन से सामना हुआ तो राफेल टारगेट को पहले लॉक करेगा और मिसाइल भी पहले वही लॉन्च करेगा। 

AIR COMBAT यानी हवाई युद्ध का सबसे बुनियादी बात ये है कि आसमान में जो अपने दुश्मन को पहले देखता है और उसपर पहले वार करता है, जीत उसी की होती है। सबसे पहले इस बात पर नजर डालते हैं कि राफेल के मुक़ाबले पाकिस्तान के कौन से फाइटर जेट हैं।

पाकिस्तानी फाइटर जेट्स के साथ राफेल की कैसी हो सकती है AIR FIGHT 

पहला है F-16 और दूसरा है JF-17..ये दोनों मल्टीरोल फाइटर हैं। लेकिन राफेल के मुक़ाबले एक जेनरेशन पुराने हैं। राफेल चौथी जेनरेशन से भी आगे का फाइटर है जबकि पाकिस्तान के ये दोनों फाइटर चौथी जेनरेशन तक वाली ख़ूबी भी नहीं रखते। फिर भी पाकिस्तान का F-16 दोनों में ज़्यादा ख़तरनाक माना जाता है। पाकिस्तान 80 के दशक से इन विमानों का इस्तेमाल कर रहा है और लगातार इसे अपग्रेड करता रहा है।

सबसे पहले देखते हैं कि पाकिस्तान के F-16 के साथ राफेल की AIR FIGHT कैसी हो सकती है। पाकिस्तान के F-16 में लगा है अमेरिका का AN/APG-68 रडार और राफेल में फ्रांस का RBE2 रडार लगा है। पाकिस्तानी F-16 के पास ऐमरैम मिसाइल है जिसकी रेंज 120 किलोमीटर है जबकि राफेल में लगी है मीटियोर एयर टू एयर मिसाइल, जिसकी रेंज 150 किलोमीटर है।

पढ़ें: भारत पहुंचे 5 राफेल लड़ाकू विमान, अंबाला एयरबेस पर की लैंडिंग, वाटर कैनन से हुआ भव्य स्वागत

F-16 जब राफेल के 200 किलोमीटर के दायरे में आएगा तो वो उसे ट्रैक करना शुरू कर देगा और 130 किलोमीटर के दायरे में आते ही राफेल अपनी मीटियोर मिसाइल फायर करेगा। जबकि F-16 के लिये राफेल को देखना तब मुमकिन होगा जब वो 120 किलोमीटर दूर होगा और जब दोनों के बीच 84 किलोमीटर की दूरी रह जाएगी तभी वो राफेल पर 120 किलोमीटर रेंज वाली एमरैम मिसाइल लॉन्च कर पाएगा। 

अब ऐसे में आप अंदाज़ा आराम से लगा सकते हैं कि राफेल F-16 को पहले ट्रैक करने के साथ ही उसे ख़त्म कर देगा और अपना रूट बदलते हुए F-16 की रेंज से बाहर निकल जाएगा। आसमानी जंग पूरी तरह मिसाइलों की रेंज और दुश्मन के विमान की ट्रैकिंग पर निर्भर करती है इसीलिये राफेल का वेपन पैकेज पाकिस्तान पर भारी है। 

चीन के फाइटर जेट्स के साथ राफेल की कैसी हो सकती है AIR FIGHT 
अब देखिये चीन के साथ क्या EQUATION है। चीन के कौन से जहाज़ हैं जिनका मुक़ाबला राफेल से हो सकता है। चीन के पास J-10, J-11, J-8, J-7 विमान हैं जो राफेल के मुकाबले कमजोर माने जाते हैं। इसलिये हमने चीन के सबसे आधुनिक माने जाने वाले J-20 के साथ राफेल को टेस्ट करने का फ़ैसला किया है...और ये चीन का पहला स्टेल्थ एयरक्राफ्ट भी है...जिसे चीन ने अमेरिका के F-22 और F-35 से मुक़ाबला करने के लिये बनाया है।

J-20 को चीन पांचवीं पीढ़ी का फाइटर बोलता है..लेकिन इसमें लगे सिस्टम इसे हद से हद चौथी पीढ़ी का विमान बताते हैं। इसमें तीसरी पीढ़ी का इंजन लगा है और ऐसा ही इंजन भारत के सुखोई विमान में भी है। 

चीन के जे-20 के पीछे रूस का सुखोई-35 फाइटर जेट भी है। चीन ने पिछले कुछ सालों में रूस से सुखोई-35 विमान ख़रीदे हैं और इसके इंजन भी लिये हैं। इन्हीं इंजन और उनके सिस्टम का इस्तेमाल वो J-20 में भी कर रहा है। यानी चीन का पांचवीं पीढ़ी का जो फाइटर है वो भी चाइनीज़ टर्म की तरह फुलप्रूफ़ नहीं है। 

राफेल का इंजन और इसके वेपन सिस्टम, इसका राडार और सेंसर...सब इसे चौथी पीढ़ी से आगे का विमान बनाते हैं। राफेल 150 किलोमीटर के दायरे में 40 टारगेट को ट्रैक कर सकता है। राफेल के राडार वार्निंग रिसीवर इसे बहुत बड़े दायरे में किसी भी ख़तरे के लिये आगाह कर देते हैं। 

वहीं J-20 चीन का बहुत ही सीक्रेट फाइटर है। चीन ने 200 किलोमीटर की रेंज वाली PL-15 मिसाइल बनाने का दावा किया है और वो J-20 को भी इससे लैस कर चुका होगा। लेकिन ये मिसाइल किसी फाइटर नहीं...बल्कि AWACS जैसे राडार प्लेन या फिर बड़े रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट के ख़िलाफ़ कारगर मानी जाती है। इसकी वजह है मिसाइल का PROPULSION सिस्टम यानी इंजन।

लेकिन J-20 और इसकी मिसाइल को ख़ारिज करने से पहले इसके बारे कुछ और बातें भी बताना ज़रूरी है...हालांकि चीन ने अपने इस विमान की जानकारी दुनिया के सामने नहीं रखी है। J-20 का नोज़ सेक्शन बड़ा है...यानी इसमें ज़्यादा बड़ा राडार फिट हो सकता है। ऐसे में इसकी ट्रैकिंग रेंज और कैपेसिटी भी बड़ी होगी।

कहा जा रहा है कि जो राडार चीन अपने J-11 में इस्तेमाल कर रहा है वहीं राडार J-20 में भी लगा है। फिर भी अगर J-20 और राफेल आमने सामने हुए तो हवाई युद्ध का पहले ट्रैक और पहले अटैक करने वाला सिद्धांत यहां भी लागू होगा

राफेल दो सौ किलोमीटर पर अपने टारगेट को ट्रैक करेगा और 130  किलोमीटर की दूरी पर पहुंचने पर J-20 की टारगेट लॉकिंग होगी और मिसाइल फायर होगी। J-20 के राडार को लेकर अभी शक की बहुत गुंजाइश है और PL-15 मिसाइल को लेकर भरोसा नहीं किया जा सकता है। 

ऐसे में चीन J-20 को भारत के ख़िलाफ़ नहीं उतारेगा इसकी पूरी गुंजाइश है। क्योंकि अगर J-20 राफेल के हाथ मारा गया तो चाइनीज़ इंजनीयरिंग के साथ उसकी पूरी एयरफोर्स पर सवाल उठने लगेंगे और इस तरह चाइनीज़ सुप्रीमेसी का अंत हो जाएगा। 

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