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शिकागो में शून्य पर ही क्यों बोले स्वामी विवेकानंद, जानिए

 Edited By: Rajesh Yadav
 Published : Jan 12, 2016 02:33 pm IST,  Updated : Jan 11, 2018 09:56 pm IST

सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने वाले विवेकानंद का जिक्र जब कभी भी आएगा उनके अमेरिका में दिए गए यादगार भाषण की चर्चा जरूर होगी। यह एक ऐसा भाषण था जिसने भारत की अतुल्य विरासत और ज्ञान का डंका बजा दिया था।

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विवेकानंद को उनकी गुरु मां ने दी बड़ी सीख:

स्वामी विवेकानंद के गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था। वो किसी भी काम को करने से पहले उनसे सलाह-मशविरा और आशीर्वाद लिया करते थे। स्वामी जी के गुरु का देहांत हो चुका था और जिस साल उन्हें अमेरिका जाना था वो उनके साथ नहीं थे। इस स्थिति में उन्होंने अपनी गुरु मां का आशीर्वाद लेना चाहा। विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस की पत्नी मां शारदा के पास पहुंचे। उन्होंने उनके पैर छुए और उन्हें बताया कि उन्हें अमेरिका में भाषण देने जाना है और वो उनका आशीर्वाद लेना चाहते हैं। लेकिन इस पर मां शारदा ने कहा कि तुम कल आना मैं देखना चाहती हूं कि तुम इस काबिल हो भी या नहीं। मां की बात सुनकर स्वामी जी थोड़ा हैरान हो गए। लेकिन गुरु मां के कहे अनुसार वो अगले दिन फिर उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे। विवेकानंद जब पहुंचे तो मां शारदा रसोई में थीं। विवेकानंद ने उनसे कहा कि मां मैं आपका आशीर्वाद लेने आया हूं। मां शारदा ने यह सुनकर कहा ठीक है पहले तुम मुझे चाकू उठाकर दो मुझे सब्जी काटनी है। विवेकानंद ने चाकू उठाया और मां की तरफ बढ़ा दिया। चाकू लेते ही मां शारदा ने अपने विवेकानंद को आशीर्वाद दे दिया। मां ने कहा, ‘जाओ नरेंद्र मेरे समस्त आशीर्वाद तुम्हारे साथ हैं।' मां का आशीर्वाद पाने के बाद भी नरेंद्र को बेचैनी थी, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर चाकू का आशीर्वाद से क्या जुड़ाव है और उन्होंने आखिरकार मां से यह पूछ ही लिया। तब मां ने उन्हें बताया कि बेटा, “जब भी कोई दूसरे को चाकू पकड़ाता है तो धार वाला सिरा पकड़ाता है लेकिन तुमने ऐसा नहीं किया।” 

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