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रेलवे का निजीकरण नहीं, जनसेवा सबसे अहम: सुरेश प्रभु

 Written By: Bhasha
 Published : Apr 27, 2017 01:33 pm IST,  Updated : Apr 27, 2017 01:33 pm IST

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेलवे के निजीकरण की संभावनाओं से इनकार करते हुए कहा कि आम लोगों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है जो इस सार्वजनिक परिवहन पर बहुत अधिक निर्भर हैं।

Suresh Prabhu- India TV Hindi
Suresh Prabhu

नयी दिल्ली: रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेलवे के निजीकरण की संभावनाओं से इनकार करते हुए कहा कि आम लोगों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है जो इस सार्वजनिक परिवहन पर बहुत अधिक निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में भी रेलवे को जनसेवा दायित्वों का निर्वहन जारी रखना होगा जिस पर वर्तमान में 30,000 से 35,000 करोड़ रूपये के बीच खर्च आता है। प्रभु ने इस बात को खारिज कर दिया कि लंबी अवधि में रेलवे आम लोगों के परिवहन का किफायती साधन नहीं रह जाएगा और यह भी निजी सेवाओं के मार्ग पर आ जाएगा। उन्होंने कहा, भारत में ऐसा नहीं हो सकता। (भारत के इस कदम ने उड़ाया अमेरिका, रूस और चीन के होश...)

प्रभु ने कहा, मेरे ख्याल से रेलवे आम लोगों के लिए परिवहन का अंतिम विकल्प है और हमें इस भार और जिम्मेदारी का निर्वहन करना है। बुधवार को पीटीआई-भाषा से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, आप यह नहीं कह सकते हैं कि निजीकरण से रेलवे की समस्याओं का समाधान हो जाएगा। प्रभु के मुताबिक इसका समाधान परिणाम आधारित अवधारणा पर निर्भर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व में बहुत कम ही रेलवे का निजीकरण हुआ है।

उन्होंने ब्रिटिश रेल का हवाला दिया जिसका निजीकरण हुआ है और उसके मालिकों में से एक इटली की एक सरकारी कंपनी है। उन्होंने कहा, उसे किसने खरीदा है?...सरकारी संस्थाएं उसे खरीद रही हैं। प्रभु ने कहा कि जनसेवा दायित्व के साथ कोई भी निजी कंपनी रेलवे को नहीं खरीदना चाहेगी। उन्होंने कहा, आपको लगता है कि निजी विमान कंपनी किसानों के लिए विशेष उड़ानों का परिचालन करेंगी। हम ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों को लेकर गंभीर हैं।

जनसेवा दायित्व निर्वहन के मुद्दे को उठाते हुए प्रभु ने विश्वव्यापी व्यवस्था को रेखांकित किया। उन्होंने साथ ही कहा, मैं इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हूं कि हम आम आदमी के हित की अनदेखी नहीं कर सकते हैं, हमें यह :जनसेवा दायित्व निर्वहन: करना ही है। बकौल प्रभु भारतीय रेलवे ने नीति आयोग से इस पहलू पर गौर करने को कहा है।

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