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सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को पार करने वाला पश्चिम बंगाल चौथा राज्य

 Reported By: Bhasha
 Published : Jul 03, 2019 06:30 pm IST,  Updated : Jul 03, 2019 06:30 pm IST

ममता बनर्जी सरकार की तरफ से अनारक्षित श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा करने से पश्चिम बंगाल उच्चतम न्यायालय द्वारा तय 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को पार करने वाला चौथा राज्य बन गया है।

Mamata Banerjee File Photo- India TV Hindi
Mamata Banerjee File Photo Image Source : PTI

कोलकाता: ममता बनर्जी सरकार की तरफ से अनारक्षित श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा करने से पश्चिम बंगाल उच्चतम न्यायालय द्वारा तय 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को पार करने वाला चौथा राज्य बन गया है। मंगलवार को की गई यह घोषणा केंद्र की भाजपा नीत सरकार द्वारा छह माह पहले स्वीकृत इसी तरह के प्रस्ताव के बाद आई है। बंगाल ने अब तक सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में 45 प्रतिशत आरक्षण दिया है। अनुसूचित जाति के लिए 22 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए छह प्रतिशत और अन्य पिछड़ी जातियों के लिए 17 प्रतिशत आरक्षण दिया है। 

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण जोड़ने के फैसले से कुल आरक्षण उच्चतम न्यायालय द्वारा अनिवार्य 50 प्रतिशत की सीमा को पार करता है। इसके अलावा तीन अन्य राज्यों में महाराष्ट्र ने इससे पहले शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 68 प्रतिशत दिया जिसमें से 16 प्रतिशत आरक्षण मराठा लोगों के लिए है। मंत्रिमंडल द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किए जाने के बाद महाराष्ट्र सबसे अधिक 78 प्रतिशत आरक्षण देने वाला राज्य बन गया है। 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने मंगलवार को राज्य विधानसभा को आश्वासन दिया कि राज्य में 69 प्रतिशत आरक्षण जारी रहेगा जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का फैसला राजनीतिक पार्टियों की सर्वसम्मति के बाद लिया जाएगा। तेलंगाना विधानसभा ने इससे पहले मुस्लिमों में सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरी में 12 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले विधेयक को स्वीकार किया। विधेयक के बाद से आरक्षण की मात्रा 62 प्रतिशत पर पहुंच गई। 

राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पश्चिम बंगाल संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि पात्रता की शर्तों की घोषणा बाद में की जाएगी लेकिन जो अन्य आरक्षण के तहत आते हैं उन्हें यह आरक्षण नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा, “यह एक ऐतिहासिक फैसला है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी में आने वाले लोगों की पहचान करने के कई कारक हैं। इन ब्यौरों का सरकारी आदेश में उल्लेख होगा जिसे जल्द ही जारी किया जाएगा।” 

राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राजीब बनर्जी ने कहा कि यह कदम समाज के उन वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा जो पहले से आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “एसी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण पहले के समान ही है। यह नया आरक्षण ‍इन तीन निश्चित श्रेणियों से बाहर वालों के लिए है।” राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के अब्दुल मन्नान, माकपा के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रबर्ती के साथ ही भाजपा के मनोज तिग्गा ने कदम का स्वागत किया। 

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