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SC ने बरकरार रखी निर्भया के कातिलों की सजा, जानें कौन हैं ये गुनहगार

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 05, 2017 02:56 pm IST,  Updated : May 05, 2017 02:56 pm IST

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के एक कोने में हैवानियत का एक ऐसा नंगा नाच हुआ, जिसने पूरे देश को गुस्से और शर्म के अहसास में एक साथ जकड़ दिया था।

Nirbhaya gangrape case- India TV Hindi
Nirbhaya gangrape case

नई दिल्ली: 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के एक कोने में हैवानियत का एक ऐसा नंगा नाच हुआ, जिसने पूरे देश को गुस्से और शर्म के अहसास में एक साथ जकड़ दिया था। 16 दिसंबर 2012 को 'निर्भया' की अस्मत और उसके जीवन को 6 दरिंदों ने तार-तार कर दिया था। निर्भया ने अपनी जिंदगी की लड़ाई बहुत बहादुरी से लड़ी, लेकिन मौत से जीत न सकी।

आज, इस घटना के 1600 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसी निर्भया को इंसाफ देते हुए उसके गुनहगारों की फांसी की सजा बरकरार रखी है। उन 6 में से एक दोषी जुवेनाइल था, और वह बाल सुधार गृह से अब बाहर भी आ चुका है। बाकी 5 दरिंदों में से एक राम सिंह ने खुद फांसी लगा ली, और बाकी 4 की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। आइए, आज हम आपको बताते हैं निर्भया के गुनहगारों के बारे में...

राम सिंह: 32 वर्षीय राम सिंह ही उस बस का ड्राइवर था, जिसमें निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। राम सिंह इस वारदात का मुख्य आरोपी था। राम सिंह और उसके दोस्तों ने निर्भया के साथ गैंगरेप करने के बाद उसे और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था। घटना के कुछ घंटे बाद ही दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। 11 मार्च 2013 को राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।

Ram Singh
Ram Singh

राम सिंह।

मुकेश सिंह: मुकेश (32) उस बस का क्लीनर था जिसमें इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया। गैंगरेप की घटना के समय मुकेश भी बस में मौजूद था। यह शख्स अभी तिहाड़ जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मुकेश की फांसी की सजा बरकरार रखी है।

विनय शर्मा: पेशे से ट्रेनर विनय शर्मा (26) वारदात के समय बस चला रहा था। विनय ने पिछले साल जेल के भीतर आत्महत्या की कोशिश की थी लेकिन वह बच गया। फिलहाल यूनिवर्सिटी की परीक्षा की तैयारी कर रहा विनय तिहाड़ जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने विनय की भी फांसी की सजा को बरकरार रखा है।

पवन गुप्ता: फल बेचने का काम करने वाला पवन (24) भी वारदात के समय अपने दोस्तों के साथ उस बस में मौजूद था। पवन भी फिलहाल तिहाड़ जेल में अन्य दोषियों के साथ बंद है और वहीं से ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। पवन की भी फांसी की सजा को देश की सर्वोच्च अदालत ने बरकरार रखा है।

अक्षय ठाकुर: अक्षय ठाकुर (33) बिहार का रहने वाला था और अपनी पढ़ाई छोड़कर घर से भागकर दिल्ली आ गया था। यहां उसकी दोस्ती राम सिंह और फल बेचने वाले पवन गुप्ता से हुई थी। अक्षय ठाकुर भी तिहाड़ जेल में बंद है और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी भी फांसी की सजा पर अपनी मुहर लगा दी है।

नाबालिग दोषी: गैंगरेप का छठा गुनहगार एक नाबालिग है। इसी शख्‍स ने निर्भया को बस में चढ़ने के लिए मनाया था। घटना के वक्‍त वह नाबालिग था इसलिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसे 3 साल की अधिकतम सजा के साथ सुधार केंद्र में भेजा था। दिसंबर, 2015 में सजा पूरी करने के बाद उसे रिहा कर दिया गया। कहा जाता है कि गैंगरेप के दौरान निर्भया से सबसे ज्यादा दरिंदगी इसी नाबालिग ने की थी।

Juvenile
Juvenile

नाबालिग दोषी की फाइल फोटो।

अब तक क्या हुआ?

सभी 6 आरोपियों के खिलाफ बलात्‍कार, अपहरण और हत्‍या का मामला दर्ज किया गया। यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला और 13 सितंबर, 2013 को 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई जबकि नाबालिग को 3 साल की अधिकतम सजा के साथ सुधार केंद्र में भेज दिया गया। 13 मार्च, 2014 को दिल्‍ली हाई कोर्ट ने भी इन सभी की फांसी की सजा को बरकरार रखा। 5 मई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इनकी फांसी की सजा पर अपनी मुहर लगा दी।

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