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पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण, पलक झपकते ही दुश्मन का काम होगा तमाम

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Mangal Yadav
 Published : Jul 08, 2026 09:05 pm IST,  Updated : Jul 08, 2026 09:21 pm IST

DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की स्वदेशी डिज़ाइन और डेवलपमेंट क्षमताओं में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण- India TV Hindi
पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण Image Source : REPORTER

नई दिल्लीः डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) ने बुधवार को ओडिशा के चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का सफल फ़्लाइट टेस्ट किया। इसकी जानकारी देते हुए रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कि रॉकेट का टेस्ट ज़रूरत के हिसाब से तय 60 किलोमीटर की कम से कम रेंज के लिए किया गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रॉकेट ने उड़ान के दौरान सभी तय किए गए मैन्यूवर (गतिविधियां) दिखाए और ठीक वैसे ही टारगेट पर निशाना साधा जैसा अनुमान लगाया गया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पनीका के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ और भारतीय सेना को बधाई दी है। रक्षा मंत्री ने इसे लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट के लिए स्वदेशी डिज़ाइन और डेवलपमेंट क्षमता में एक बड़ी उपलब्धि बताया। 

DRDO के चेयरमैन ने की निगरानी

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी और आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी और रिसर्च सेंटर इमारत के सहयोग से इस रॉकेट को डेवलप किया है। रॉकेट को पिनाका लॉन्चर से लॉन्च किया गया जो पहले से ही सर्विस में है। सरकार ने बताया कि DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह, जो रक्षा सचिव और रक्षा R&D विभाग के सचिव भी हैं, ने इस रॉकेट के परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की और उनकी मदद की।

रॉकेट को पहले से इस्तेमाल हो रहे पिनाका लॉन्चर से लॉन्च किया गया, जिससे इसकी वर्सटैलिटी (बहुमुखी प्रतिभा) का पता चला और एक ही लॉन्चर से अलग-अलग रेंज वाले पिनाका वैरिएंट्स को लॉन्च करने की क्षमता भी देखने को मिली 

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सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदा

अधिकारियों ने बताया कि योजना के मुताबिक उड़ान के दौरान सभी मानकों पर खरा उतरते हुए एलआरजीआर ने पहले से तय रास्ते का बिल्कुल सटीक तरीके से पालन किया और बेहतरीन सटीकता के साथ अपने लक्ष्य को भेदा। उन्होंने बताया कि परीक्षण की निगरानी करने के लिए लगाए गए सभी उपकरणों ने उड़ान के समय रॉकेट के पूरे रास्ते पर नजर रखा। 

दिसंबर 2025 में भी हुआ था परीक्षण

इससे पहले, दिसंबर 2025 में डीआरडीओ ने 120 किलोमीटर की रेंज के लिए इस रॉकेट का पहला टेस्ट फ़्लाइट किया था। वह टेस्ट भी चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से ही किया गया था। इसलिए अभी रॉकेट की असरदार रेंज 60 से 120 किलोमीटर के बीच है।

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