केरल के कोल्लम जिले में एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और स्थानीय पुलिस ने कई संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ़्तार किया है। इन पर आरोप है कि वे बिना वैध दस्तावेज़ों के राज्य में गैर कानूनी तरीके से रहते थे और काम कर रहे थे। हाल ही में हुए एक ऑपरेशन में, कोल्लम ज़िले के कोट्टाराक्कारा से 10 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह ग्रुप ज़िले में काम कर रहा था और उनके पास आधार कार्ड समेत पहचान के दस्तावेज़ पाए गए। उन्हें करिक्कम में कबाड़ की एक दुकान के पास से हिरासत में लिया गया।
बांग्लादेशी जोड़ा 10 साल से केरल में
एक अलग मामले में, बांग्लादेश के ढाका ज़िले के बागेरहाट में गुलशा गली के वार्ड 4 के रहने वाले एक बांग्लादेशी जोड़े—मेलेन खान (47) और उनकी पत्नी मुगल खंडाल (42)—को नींदकरा से गिरफ़्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, यह जोड़ा बिना वैध पासपोर्ट, वीज़ा या यात्रा से जुड़े अन्य कानूनी दस्तावेज़ों के भारत में दाखिल हुआ था। जांच करने वालों ने बताया कि यह जोड़ा लगभग दस साल से राज्य में रह रहा था। बताया जाता है कि वे सात साल तक चालाकुडी में रहे, फिर तीन साल पहले करुणागप्पल्ली चले गए और बाद में लगभग डेढ़ महीने पहले नींदकरा में रहने लगे।
पुलिस के मुताबिक, वे अपनी राष्ट्रीयता छिपाकर और प्रवासी मज़दूर बनकर किराए पर घर लेते थे, और प्लास्टिक का कचरा इकट्ठा करके उसे कबाड़ी वालों को बेचकर गुज़ारा करते थे। दोनों जगहों पर तलाशी के दौरान अधिकारियों को जाली पहचान दस्तावेज मिले। फॉरेनर्स एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए हैं और आरोपियों को अदालत में पेश करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
कोच्चि में 10 संदिग्ध बांग्लादेशी गिरफ्तार
ये गिरफ्तारियां केरल में अवैध आव्रजन के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई के बीच हुई हैं। इससे पहले, खुफिया जानकारी के आधार पर पालारीवट्टम पुलिस ने कोच्चि में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम लिंक रोड के पास एक घर से 10 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तार लोगों की पहचान भी सामने आई
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान लालोन हुसैन, रियाद अली, सुमन मंडल, फेडोस मंडल, जॉनी अहमद, राजीव हुसैन, अब्दुर जब्बार, मिथुन अली, राहिन अली और बुलबुल अहमद के तौर पर हुई है। पुलिस ने बताया कि यह ग्रुप केरल में लगभग एक साल से कबाड़ इकट्ठा करने का काम कर रहा था। उनके मोबाइल फोन से बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान पत्र और जन्म प्रमाण पत्रों की सॉफ्ट कॉपी बरामद की गईं। उन पर फॉरेनर्स एक्ट, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) एक्ट, 1920 के तहत मामला दर्ज किया गया।
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