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हिंसा की आग में जल रहा मणिपुर! अब तक 75 से ज्यादा मौतें, 3 दिन के दौरे पर अमित शाह

 Published : May 29, 2023 12:22 pm IST,  Updated : May 29, 2023 12:22 pm IST

मणिपुर में हिंसा की आग लगभग एक महीने से जारी है। हालात को काबू में करने के लिए आज से गृह मंत्री अमित शाह राज्य में तीन दिन के दौरे पर जा रहे हैं।

मणिपुर 3 मई से हालात अस्थिर, सेना की है तैनाती- India TV Hindi
मणिपुर 3 मई से हालात अस्थिर, सेना की है तैनाती Image Source : PTI

मणिपुर 3 मई से हिंसा की आग में जल रहा है। इस बीच आज से गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन के दौरे पर मणिपुर पहुंच रहे हैं। शाह 1 जून तक मणिपुर में रहेंगे। गृह मंत्री हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और पीड़ितों से भी मुलाकात होगी। सबको उम्मीद है कि शाह के दौरे से जातीय संकट का समाधान निकल सकता है। अमित शाह कूकी और मैतेई समुदाय के संगठनों से भी मुलाकात करेंगे। 

अब तक 40 आतंकियों का खात्मा

इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 40 आतंकियों के खात्मे का दावा किया है। एन. बीरेन सिंह ने रविवार को कहा कि सुरक्षा बलों ने राज्य में शांति कायम करने के लिए अभियान शुरू करने के बाद से घरों में आगजनी और लोगों पर गोलीबारी करने में शामिल लगभग 40 सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराया है। 

मणिपुर में हिंसा की वजह क्या?
बताया जा रहा है कि मणिपुर में हिंसा की दो मुख्य वजहें हैं-

  1. मैतई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने पर कुकी और नागा समुदाय का विरोध 
  2. सरकारी भूमि सर्वे और इस भूमि सर्वे के खिलाफ कुकी समुदाय 

कैसे शुरू हुई मणिपुर में हिंसा
दरअसल, 3 मई को कुकी समुदाय ने राज्य में प्रदर्शन किया था। ये लोग मैतेई समुदाय को मिले दर्जे का विरोध कर रहे थे। इसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा शुरू हो गई थी। इसके बाद 4 मई को कुकी और मैतेई समुदाय आपस में भिड़ गए। इस दौरान जमकर आगजनी और तोड़फोड़ भी हुई। जिसके बाद 5 मई से राज्य में सेना की तैनाती कर दी गई।

गौरतलब है कि मैतेई समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की मांग के विरोध में 3 मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद मणिपुर में जातीय झड़पों में 75 से अधिक लोगों की मौत हो गईं। मैतेई मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। राज्य में हालात सामान्य करने के लिए अर्धसैनिक बलों के अलावा सेना और असम राइफल्स की लगभग 140 टुकड़ियां तैनात करनी पड़ी, जिनमें 10,000 से अधिक कर्मी शामिल हैं। 

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