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डार्कनेट ड्रग माफिया पर NCB का करारा प्रहार, 'टीम कल्कि' का भंडाफोड़, कई देशों तक फैला था नेटवर्क

Reported By : Abhay Parashar Edited By : Dhyanendra Chauhan Published : Mar 08, 2026 07:36 pm IST, Updated : Mar 08, 2026 07:45 pm IST

ड्रग माफियाओं पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। एनसीबी की टीम ने 13 घरेलू पार्सलों और नीदरलैंड से आए 2 पार्सलों से 2,338 LSD ब्लॉटर्स, और 160 MDMA की गोलियां बरामद की हैं।

LSD, MDMA और लिक्विड MDMA की बड़ी खेप बरामद- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT LSD, MDMA और लिक्विड MDMA की बड़ी खेप बरामद

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने डार्कनेट ड्रग नेटवर्क पर बड़ी कार्यवाही की है। एनसीबी ने 'टीम कल्कि” नाम से संचालित एक पैन-इंडिया ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क जनवरी 2025 से डार्कनेट प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप “सेशन” के जरिए सक्रिय था। पिछले तीन महीनों में विकसित खुफिया जानकारी के आधार पर एनसीबी ने नई दिल्ली में ऑपरेशन चलाकर इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

बरामद हुई ड्रग्स की खेप

ऑपरेशन के दौरान एनसीबी अधिकारियों ने 13 घरेलू पार्सलों और नीदरलैंड से आए 2 पार्सलों से 2,338 LSD ब्लॉटर्स, 160 MDMA (एक्स्टेसी) गोलियां (कुल वजन 77.517 ग्राम), 73.612 ग्राम चरस, 3.642 ग्राम एम्फेटामाइन और 3.6 किलोग्राम लिक्विड MDMA बरामद किया। यह बरामदगी इस बात को दर्शाती है कि ड्रग तस्कर मादक पदार्थों और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की आपूर्ति के लिए डार्कनेट मार्केटप्लेस और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। 

तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

यह कार्रवाई भारत में डार्कनेट आधारित नारकोटिक्स तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जांच में अब तक सामने आया है कि डार्कनेट वेंडर “टीम कल्कि” को अनुराग ठाकुर अपने सहयोगी विकास राठी के साथ मिलकर संचालित कर रहा था। दोनों आरोपी आदतन अपराधी हैं और पहले भी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत दर्ज मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं। 

ऐसे शुरू किया टीम कल्कि

विकास राठी को पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज चरस तस्करी के मामले में तिहाड़ जेल में बंद किया गया था, जबकि अनुराग ठाकुर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज मेथाम्फेटामाइन तस्करी के मामले में जेल में रहा था। दोनों एक ही समय पर तिहाड़ जेल में बंद थे, जहां उनकी मुलाकात हुई और बाद में उन्होंने मिलकर डार्कनेट ड्रग नेटवर्क “टीम कल्कि” शुरू किया।

वेंडर अकाउंट को मिली हुई थी चार स्टार रेटिंग

शुरुआत में आरोपी डार्क वेब फोरम “ड्रेड” पर सक्रिय थे, जहां उनके वेंडर अकाउंट को चार-स्टार रेटिंग मिली हुई थी, जो बड़ी संख्या में सफल ऑर्डर पूरे होने का संकेत देती है। “ड्रेड” पर स्थापित होने के बाद आरोपियों ने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप “सेशन” के जरिए भी ड्रग्स की बिक्री और ऑर्डर की आपूर्ति शुरू कर दी।

नीदरलैंड, पोलैंड और जर्मनी तक नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का वितरण तंत्र पूरे भारत में फैला हुआ था और आरोपी कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए अत्याधुनिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। यह भी पता चला है कि आरोपी LSD और MDMA जैसे ड्रग्स नीदरलैंड, पोलैंड और जर्मनी में मौजूद अंतरराष्ट्रीय डार्कनेट वेंडर्स से मंगाते थे। 

कूरियर और पार्सल सेवाओं से भेजी जाती थी खेप

देशभर के ग्राहकों से ऑर्डर डार्क वेब फोरम “ड्रेड” और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप “सेशन” के जरिए प्राप्त किए जाते थे, जिससे उनकी पहचान और डिजिटल फुटप्रिंट छिपे रहते थे। ग्राहकों से ऑर्डर मिलने के बाद एक आरोपी ऑर्डर की जानकारी अपने सहयोगी को देता था, जो ड्रग्स की पैकेजिंग और पार्सल भेजने का काम संभालता था। इसके बाद मादक पदार्थों की खेप देश के विभिन्न हिस्सों में कूरियर और पार्सल सेवाओं के जरिए भेजी जाती थी।

डेड ड्रॉप डिलीवरी तकनीक का भी इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क “डेड ड्रॉप” डिलीवरी तकनीक का भी इस्तेमाल करता था। इसमें मादक पदार्थों वाले पार्सल सीधे ग्राहकों को देने के बजाय पहले से तय स्थानों पर रख दिए जाते थे। बाद में खरीदारों को उस स्थान की जानकारी दी जाती थी, ताकि वे वहां से पार्सल उठा सकें और पकड़े जाने का जोखिम कम रहे। यह तरीका मुख्य रूप से दिल्ली के सीमित इलाकों में और उन्हीं ग्राहकों के लिए इस्तेमाल किया जाता था जिनके पहले से कई ऑर्डर का रिकॉर्ड था। देश के अन्य हिस्सों में डिलीवरी के लिए मुख्य रूप से स्पीड पोस्ट और अन्य कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता था। पकड़े जाने से बचने के लिए हर खेप भेजने के लिए अलग-अलग कूरियर या पार्सल बुकिंग ऑफिस का उपयोग किया जाता था।

कई राज्यों में भेजी थी ड्रग्स की खेप

आगे की जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क ने देश के कई राज्यों में ड्रग्स की खेप भेजी थी। कुछ पार्सल दिल्ली, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक में डिलीवरी से पहले ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जब्त कर लिए गए थे, जिनके विवरण का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि जनवरी 2025 से अब तक यह नेटवर्क 1,000 से अधिक पार्सल भेज चुका है। आरोपियों के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी बरामद किए गए हैं और इस ऑपरेशन से जुड़ा एक क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट भी चिन्हित किया गया है।

भुगतान के लिए मोनेरो, USDT जैसे अनहोस्टेड वॉलेट का इस्तेमाल

आरोपी भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते थे और मोनेरो तथा USDT जैसे अनहोस्टेड वॉलेट के जरिए पैसे लेते थे। इसके बाद रकम को कई इंटरमीडियरी वॉलेट के जरिए घुमाया जाता था और करीब 10 प्रतिशत कन्वर्जन चार्ज देकर उसे USDT में बदला जाता था, जिसे बाद में कोल्ड वॉलेट में स्टोर किया जाता था। कुछ मामलों में म्यूल KYC-आधारित वॉलेट का भी इस्तेमाल किया गया, ताकि रकम को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम में डाला जा सके।

अब सहयोगियों का पता लगा रही NCB की टीम

USDT भुगतान लेने के लिए अस्थायी अनहोस्टेड वॉलेट बनाए जाते थे और पैसा आते ही उसे कई स्तर के इंटरमीडियरी वॉलेट के जरिए आगे ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिससे ट्रांजेक्शन ट्रेल छिपाई जा सके और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। एनसीबी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों की पहचान करने, वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का खुलासा करने के लिए जांच जारी रखे हुए है। साथ ही “टीम कल्कि” के पूरे ऑपरेशनल इकोसिस्टम को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इसके पहले भी NCB ने की बड़ी कार्रवाई

यह कार्रवाई डार्कनेट के जरिए हो रही ड्रग तस्करी और सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क के खिलाफ एनसीबी के देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। इससे पहले भी एनसीबी ने ऑपरेशन केटामेलन (2025) और ऑपरेशन जाम्बाडा (2023) जैसे बड़े ऑपरेशन चलाकर संगठित ड्रग तस्करी गिरोहों और अंतरराष्ट्रीय डार्कनेट मार्केट से जुड़े सप्लाई चेन को ध्वस्त किया है।

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