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मनचले से बचने थाने गई, उल्टा पुलिस ने ही डरा दिया, सदमे में बेहोश होकर गिरी लड़की

 Published : May 18, 2026 03:57 pm IST,  Updated : May 18, 2026 03:58 pm IST

ओडिशा के मयूरभंज जिले में इंसाफ की उम्मीद लेकर थाने गई नाबालिग के सामने पुलिस की बेरुखी का नया रूप सामने आया है। छेड़छाड़ की शिकायत लेकर गई नाबालिग को थाना प्रभारी ने खुद ही इतना डरा दिया कि लड़की रो-रोकर बेहोश हो गई।

पुलिस की बेरुखी से...- India TV Hindi
पुलिस की बेरुखी से बेहोश हो गई लड़की। Image Source : REPORTER INPUT

ओडिशा के मयूरभंज जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की और उसके परिवार ने पुलिस पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि जब वे अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे, तो उन्हें न्याय मिलने के बजाय केस वापस लेने का दबाव झेलना पड़ा। आरोप है कि पुलिस के व्यवहार से लड़की इतनी डर गई कि वह थाने से बाहर निकलते ही बेहोश हो गई। उसकी हालत बिगड़ने पर पहले स्थानीय अस्पताल और फिर बारीपदा अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस के व्यवहार से टूट गई लड़की

पूरा मामला मयूरभंज जिले के मोरड़ा पुलिस स्टेशन का बताया जा रहा है। परिवार ने थाने के प्रभारी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नाबालिग को थाने बुलाकर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया। परिजनों का कहना है कि लड़की बयान दर्ज कराने गई थी, लेकिन वहां उसे मानसिक रूप से डराया गया और सख्त रवैया अपनाया गया।

परिवार ने थाना प्रभारी पर लगाया आरोप

परिवार ने इस पूरे मामले के लिए सीधे तौर पर थाना प्रभारी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी को पुलिस के व्यवहार से गहरा मानसिक सदमा पहुंचा है। परिवार का आरोप है कि वे मदद और न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें निराशा हाथ लगी।

पुलिस की बेरुखी का नया रूप

जानकारी के अनुसार, यह मामला इलाके के एक युवक के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत से जुड़ा हुआ है। परिवार का कहना है कि आरोपी युवक लगातार लड़की को परेशान कर रहा था। इसी वजह से वे पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे। लेकिन परिवार का आरोप है कि शुरू में थाना प्रभारी ने FIR दर्ज करने में भी टालमटोल की और उन्हें बार-बार इधर-उधर घूमाया गया।

थाने में फूट-फूटकर रोई नाबालिग

परिजनों का कहना है कि जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तब उन्होंने SDPO से संपर्क किया। इसके बाद उन्हें दोबारा थाने बुलाया गया। परिवार का आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने के बाद थाने का रवैया और ज्यादा सख्त हो गया। बयान दर्ज करने के दौरान नाबालिग पर कथित तौर पर दबाव बनाया गया, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गई और फूट-फूटकर रोने लगी।

घटना के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और जो भी अधिकारी दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मयूरभंज के ASP ने क्या कहा?

इस मामले पर मयूरभंज के ASP दीपक कुमार ने कहा, "मोरड़ा में कल एक रिपोर्ट कराई गई थी जिसमें एक नाबालिग लड़की, जिसने इस साल मैट्रिक परीक्षा दी है, उसे एक युवक श्रवण कुमार भुइयां परेशान कर रहा है। वह कमेंट मारता है और उसका पीछा करता है। रिपोर्ट आने के बाद हमने तुरंत एक केस रजिस्टर किया है। आरोपी पर बीएनएस की धारा 78,296 और 12 पोक्सो एक्ट लगाया गया है। मामले की जांच अभी जारी है। हमनें आरोपी को हिरासत में ले लिया है। आज कोर्ट में पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है। जांच पूरी होने के बाद एक्शन लिया जाएगा।

आगे उन्होंने कहा, हमने पीड़ित परिवार से लिखित शिकायत मांगी है। वे जो भी शिकायत करेंगे, हम आला अधिकारी से उसकी जांच कराएंगे। सीसीटीवी फुटेज देखेंगे और सच साबित होने पर सख्त एक्शन लेंगे।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि अगर शिकायत लेकर पहुंचने वाले लोगों को ही डर और दबाव का सामना करना पड़े, तो आम जनता न्याय के लिए किस पर भरोसा करेगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और परिवार इंसाफ का इंतजार कर रहा है।

(ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट)

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