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Rajat Sharma's Blog | महाराष्ट्र में चला देवा भाऊ का जादू : क्या ठाकरे भाइय़ों का खेल खत्म ?

 Published : Jan 16, 2026 05:01 pm IST,  Updated : Jan 16, 2026 05:01 pm IST

जनता रोज़ रोज़ मराठी बनाम गैर-मराठी, हिंदू बनाम मुसलमान, भारत बनाम पाकिस्तान जैसे मसलों पर नेताओं की बकझक से तंग आ चुकी है। उसे सुशासन चाहिए, ज़मीनी स्तर पर अपने शहर में स्वच्छ पानी, साफ सुथरी सड़क, अच्छे स्कूल, सुगम परिवहन जैसी सुविधाएं चाहिए।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे की शिव सेना ने महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव में 23 में बम्पर बढ़त हासिल कर ली है । सबसे चौंकाने वाला नतीजा रहा, देश के सबसे अमीर नगर निगम, बीएमसी (वृहन्मुम्बई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) का। यहां बीजेपी और शिंदे शिव सेना की महायुति ने उद्धव ठाकरे की शिव सेना से मुंबई नगर निगम को छीन लिया है। महायुति बीएमसी में आधी से ज्यादा सीटों पर अब काबिज़ है।

इसके साथ ही पिछले 25 साल से स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की अविभाजित शिव सेना का बीएमसी पर जो कब्ज़ा था, वो अब समाप्त हो गया है। बीएमसी में बीजेपी का कमल फूल खिला है।

बीएमसी पर ठाकरे परिवार का कब्ज़ा कायम रखने के लिए उद्धव और राज ठाकरे ने दो दशकों की कटुता को भुला कर हाथ मिलाया था लेकिन चुनाव नतीजों में दोनों की पार्टियां औंधे मुंह गिरी। राज ठाकरे की एमएनएस दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई।

मुंबई, नागपुर, पुणे, ठाणे, नासिक में बीजेपी की बम्पर जीत का श्रेय जाता है, राज्य के मुख्यमंत्री देवा भाऊ को। देवेंद्र फडणवीस ने इन चुनावों में जान लगा दी, कड़ी मेहनत की, हर शहर और नगर में प्रचार करने गये और नतीजे सामने हैं। अगर हम ‘फडणवीस इज़ किंग’ कहें, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

सिर्फ मुंबई ही नहीं, ठाणे, पिम्परी-चिंचवड, अकोला, पुणे, नागपुर, नाशिक, सोलापुर, लाटुर, नवी मुंबई में बीजेपी की महायुति को कामयाबी हासिल हुई।

उद्धव और राज ठाकरे ने जम कर मराठी कार्ड खेला, मराठी अस्मिता की दुहाई दी, अपने बेटों आदित्य और अमित को गली-मुहल्लों में जाकर वोट मांगने के लिए भेजा, लेकिन कामयाबी नसीब नहीं हुई। अब बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

शरद पवार का परिवार अपने पुराने गढ़ों में हार गया। चाचा-भतीजा ने चुनाव में हाथ मिलाया लेकिन ये काम नहीं आया।

कांग्रेस ने ‘एकला चलो’ का रास्ता अपनाया, कुछ स्थानीय पार्टियों से हाथ मिलाया, पर नतीजा सिफर निकला। कांग्रेस के परफ़र्मेंस के बारे में कुछ ज्यादा न कहें, तो बेहतर।

याद रखना चाहिए कि बीएमसी का ये चुनाव 2022 में शिव सेना में विभाजन के बाद पहली बार हुआ था। एकनाथ शिंदे की शिव सेना को बीजेपी के साथ रहने का फायदा मिला।

आखिर चुनाव नतीजे क्या कहते हैं ? आम वोटर, चाहे वो मुंबई का हो या ठाणे या पुणे का, वो अपने शहरों में सुशासन चाहता है। आम जनता रोज़ रोज़ सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, परिवहन जैसी समस्याओं से परेशान हैं। आम वोटर इन परेशानियों का निदान चाहता है और उसे आशा की किरन बीजेपी में नज़र आई है।

जनता रोज़ रोज़ मराठी बनाम गैर-मराठी, हिंदू बनाम मुसलमान, भारत बनाम पाकिस्तान जैसे मसलों पर नेताओं की बकझक से तंग आ चुकी है। उसे सुशासन चाहिए, ज़मीनी स्तर पर अपने शहर में स्वच्छ पानी, साफ सुथरी सड़क, अच्छे स्कूल, सुगम परिवहन जैसी सुविधाएं चाहिए।

जनता प्रॉपर्टी टैक्स और तमाम दूसरे टैक्स के जरिए पैसे देती है, लेकिन नगर निगम अपना काम नहीं करते। जनता चाहती है कि उन्हें कम से कम एक अच्छी ज़िंदगी जीने का अवसर तो मिले। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 15 जनवरी, 2026 का पूरा एपिसोड

 

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