1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. Rajat Sharma's Blog | ट्रम्प का टैरिफ युद्ध: अनुचित, अन्यायपूर्ण

Rajat Sharma's Blog | ट्रम्प का टैरिफ युद्ध: अनुचित, अन्यायपूर्ण

 Published : Aug 07, 2025 07:32 pm IST,  Updated : Aug 07, 2025 07:32 pm IST

अमेरिका पिछले कई महीनों से मांग कर रहा है कि भारत अपना कृषि और डेयरी बाड़ार अमेरिकी वस्तुओं के लिए खोल दे, लेकिन भारत ने इंकार कर दिया है। इसके कारण दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की तैयारी में रुकावट आ गई है।

Rajat Sharma Blog, Rajat Sharma Blog Latest, Rajat Sharma- India TV Hindi
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ, यानी कुल मिलाकर 50 प्रतिशत टैरिफ, लगाने के आदेश पर दस्तखत कर दिया। ट्रम्प ने पत्रकारों से बात करते हुए संकेत दिया है कि अभी कुछ और sanctions लग सकते हैं। जिस आदेश पर ट्रम्प ने दस्तखत किये हैं, उसमें कहा गया है कि रूस से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भारत ने तेल खरीदा है और यह अमेरिका के लिए एक “असामान्य और असाधारण” खतरा है। भारतीय वस्तुओं पर 7 अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क लागू हो जाएगा और अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क 21 दिन बाद लागू होगा।

दिल्ली में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका या ट्रम्प का नाम लिए बगैर कहा कि “भारत अपने किसानों, पशुपालकों के और मछुआरे भाई-बहनों के हितों के साथ कभी भी समझौता नहीं करेगा और मैं जानता हूं कि व्यक्तिगत रूप इसके लिए मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं।”

अमेरिका पिछले कई महीनों से मांग कर रहा है कि भारत अपना कृषि और डेयरी बाड़ार अमेरिकी वस्तुओं के लिए खोल दे, लेकिन भारत ने इंकार कर दिया है। इसके कारण दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की तैयारी में रुकावट आ गई है।

ट्रम्प द्वारा लगाये गये अतिरिक्त टैरिफ पर विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके इसे अनुचित, अन्यायपूर्ण और असंगत करार दिया है। भारत ने कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यत कदम उठाएगा।

इधर, प्रधानमंत्री मोदी इस महीने के अंत में चीन जाएंगे। 2020 में गलवान घाटी की लड़ाई के बाद  मोदी का ये पहला चीन दौरा होगा। 31 अगस्त को चीन के त्येनजिन शहर में SCO शिखर बैठक होने वाली है जिसमें मोदी हिस्सा लेंगे। इस दौरान मोदी रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत करेंगे।

मोदी पिछली बार, अक्टूबर 2019 में चीन गए थे। 2020 में गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव आया था। पिछले साल अक्टूबर में भारत और चीन ने सीमा विवाद सुलझाने के लिए तनाव कम करने का एलान किया था। इसके बाद मोदी  रूस के कज़ान शहर में ब्रिक्स शिखर बैठक में चीन के राष्ट्र्पति शी जिनपिंग से मिले थे।

सीमा पर तनाव कम करने के बाद दोनों देश धीरे-धीरे रिश्ते सामान्य करने में जुटे हैं। चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है। दोनों देश एक दूसरे के नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीज़ा भी जारी कर रहे हैं। लेकिन बड़ी बात ये है कि प्रधानमंत्री मोदी का ये चीन दौरा ऐसे वक़्त में हो रहा है, जब ट्रेड, टैरिफ और रूस से तेल ख़रीदने को लेकर ट्रंप लगातार चीन और भारत को टारगेट कर रहे हैं। इसलिए मोदी के चीन दौरे को ट्रंप के हमलों का डिप्लोमैटिक जवाब माना जा रहा है।

धराली: प्रकृति से छेड़छाड़ मत करो

उत्तराखंड के धराली में एक तरफ मौत का सन्नाटा है। दूसरी तरफ रौद्र रूप धारण करके बहती खीर गंगा के पानी का शोर है। धराली में अब गांव जैसा कुछ नहीं बचा है। तमाम घर, होटल सब मलबे में तब्दील हो गए हैं। गांव के जो लोग बच गए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है।

70 लोगों को सेना ने हेलीकॉप्टर से सुरक्षित स्थान पर पहुंचा। अभी भी 80 लोग लापता हैं। सेना, ITBP, BRO, NDRF और SDRF के जवान राहत के काम में लगे हैं।

अब ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या ये अचनाक बाढ़  बादल फटने से आई या किसी ग्लेशियर झील के टूटने से। लेकिन इससे ज्यादा अहम ये है कि धराली में इतना ज्यादा नुकसान जो हुआ, क्या ये आपदा इंसानों की गलती की नतीजा है।

मैंने इस धराली के बारे में अध्ययन किया। पता लगा कि धराली में इस तरह का सैलाब कई बार आया है।

सबसे बड़ा सैलाब 1978 में आया था। उस वक्त ज्यादा तबाही नहीं हुई थी क्योंकि तब नदी खीर गंगा नदी के किनारे न ज्यादा आबादी थी, न होटल बने थे। लेकिन 1978 में नदी के साथ जो मलबा आया, जो चट्टानें आईं, उससे नदी का रास्ता रुका। नदी ने अपना रास्ता बदला। जहां पहले पानी था, वहां पत्थर थे, पक्की मिट्टी थी। इसलिए धीरे-धीरे लोगों ने इस जमीन पर मकान, होटल, बाजार बन गए।

फिर 2018 में धराली में सैलाब आया। लेकिन उस वक्त इतनी ज्यादा तबाही नहीं हुई क्योंकि पानी और मलबा बगल से निकल गया।

लेकिन इस बार जब पूरी रफ्तार से बाढ़ आई, तो घाटी के curve पर जाने के बजाए सीधे उस route पर चला गया, जो नदी का original route था। चूंकि जहां नदी बहती थी, वहां मकान, दुकान, होटल बन गए थे, इसीलिए जो पानी के रास्ते में आया, वो सैलाब में समा गया।

मोटी बात यही है कि हम प्रकृति के साथ मिल कर चलेंगे तो प्रकृति वरदान है और प्रकृति के रास्ते में आएंगे तो वही प्रकृति हमारे लिए अभिशाप होगी। धराली के हादसे का संदेश यही है। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 06 अगस्त, 2025 का पूरा एपिसोड

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत