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महिलाओं ने साड़ी में खेला फुटबॉल मैच, जमकर वायरल हो रहा VIDEO; हो रही तारीफ

 Edited By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Jan 11, 2026 07:59 am IST,  Updated : Jan 11, 2026 07:59 am IST

ओडिशा के सुंदरगढ़ में महिलाओं ने साड़ी पहनकर फुटबॉल मैच खेला। इस मैच का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं लोगों ने इस पहल की सराहना भी की है।

साड़ी पहनकर महिलाओं ने खेला फुटबॉल।- India TV Hindi
साड़ी पहनकर महिलाओं ने खेला फुटबॉल। Image Source : REPORTER INPUT

सुंदरगढ़: आमतौर पर फुटबॉल को पुरुषों का खेल माना जाता है। इसमें तेज भागदौड़ करनी पड़ती है, जिसके लिए कपड़ों का खास खयाल रखना पड़ता है। हालांकि ओडिशा के सुंदरगढ़ से ऐसा वीडियो सामने आया है, जो इन सारी बातों को मिथक साबित करता नजर आ रहा है। दरअसल, इस वीडियो में महिलाएं साड़ी पहनकर फुटबॉल खेलती दिख रही हैं, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और यह अब चर्चा का विषय बन गया है। लोगों ने इस पहल की सराहना भी की है। वहीं इस फुटबॉल मैच का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। 

आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरी महिलाएं

दरअसल, यह अनोखा फुटबॉल मैच ओडिशा के एक माओवाद प्रभावित इलाके में आयोजित किया गया था। यहां महिलाएं पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरीं और पारंपरिक साड़ी पहनकर फुटबॉल खेलते हुए नजर आईं। यह दृश्य देखने वालों के लिए चौंकाने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी रहा, क्योंकि इसने यह संदेश दिया कि महिलाओं की भूमिका सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। वायरल वीडियो बड़बालिजोर गांव का है, जो संभिया पंचायत के अंतर्गत आता है। यह गांव सुंदरगढ़ जिले के कोईडा में है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिलाएं बिना किसी झिझक के खेल में हिस्सा ले रही हैं।

वायरल हो रहा फुटबॉल मैच का वीडियो

इस मैच की एक खास बात यह भी रही कि इसमें शामिल महिलाओं की उम्र 25 से 40 साल के बीच थी। साड़ी पहनने के बावजूद महिलाएं पूरे जोश के साथ मैदान में दौड़ती नजर आईं। वे न सिर्फ फुटबॉल पर नियंत्रण रख रही थीं, बल्कि अटैक और डिफेंस दोनों पूरी मजबूती के साथ करती दिखीं और गोल करने की लगातार कोशिश करती रहीं। यह फुटबॉल मैच एक जागरूकता पहल के तहत आयोजित किया गया था। इसका मकसद समाज में फैली लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ना और यह दिखाना था कि महिलाएं, चाहे पारंपरिक पहनावे में हों, खेलों में भी पुरुषों से कम नहीं हैं। इस आयोजन ने साफ संदेश दिया कि ताकत और हुनर कपड़ों से नहीं, बल्कि हौसले और आत्मविश्वास से पहचाने जाते हैं। (इनपुट- शुभम कुमार)

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