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मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह चौहान को कांग्रेसी नेता ने भेजा नोटिस, कहा- माफी मांगे नहीं तो कानूनी कार्रवाई

इस पर मुख्यमंत्री चौहान को मिश्रा की ओर से एक वैधानिक नोटिस भेजा है। इस नोटिस में चौहान को तीन दिनों में माफी मांगने के लिए कहा गया है, ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: July 24, 2018 18:09 IST
शिवराज सिंह चौहान।- India TV
शिवराज सिंह चौहान।

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेता के. के. मिश्रा को विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति बताए जाने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कानूनी नोटिस भेजा गया है। माफी न मांगने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मिश्रा के वकील अजय गुप्ता ने मंगलवार को बताया, "प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस नेता मिश्रा के विरुद्घ भोपाल जिला न्यायालय में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी प्रकाश कुमार उइके की अदालत में दाखिल एक व्यक्तिगत मानहानि मामले में शपथपूर्वक दिए बयान में मिश्रा को विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति बताया है। इस पर मुख्यमंत्री चौहान को मिश्रा की ओर से एक वैधानिक नोटिस भेजा है। इस नोटिस में चौहान को तीन दिनों में माफी मांगने के लिए कहा गया है, ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।" गुप्ता द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि "मुख्यमंत्री द्वारा के. के. मिश्रा के खिलाफ मानहानिकारक आक्षेप राजनीतिक कारणों से लगाया गया है, जबकि वे मानसिक तौर पर पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और कांग्रेस पार्टी के कई अहम पदों पर कार्य कर रहे हैं।"

गुप्ता ने कहा है, "किसी भी व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा ही मेंटल हेल्थकेयर एक्ट-2017 में पारित किया गया है। इस अधिनियम में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को उसके इलाज के लिए प्रयुक्त शब्दावली के अतिरिक्त किसी भी स्थिति में मानसिक रूप से बीमार नहीं कहा जा सकता है, विशेषकर राजनीतिक कारणों से तो कतई नहीं।" 

गुप्ता के अनुसार, "पारित अधिनियम में उपचाररत मरीज को भी मानसिक बीमार नहीं कहा जा सकता है तो संवैधानिक पद पर काबिज एक मुख्यमंत्री द्वारा न्यायालय में शपथपूर्वक दिए गए अपने कथन में मानसिक रूप से स्वस्थ्य किसी व्यक्ति को किस प्रमाण के आधार पर विकृत मानसिकता वाला घोषित करार किया गया। मुख्यमंत्री का यह प्रामाणिक कथन धारा, 499-500 के तहत मानहानिकारक है।"

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