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EC का EVM हैकिंग चैलेंज शुरू, 4 घंटे में साबित करना होगा मशीन भरोसेमंद नहीं

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 03, 2017 10:47 am IST,  Updated : Jun 03, 2017 03:32 pm IST

चुनाव आयोग की ईवीएम मशीन हैक करने की चुनौती पर ज़ोर आज़मायश आज चुनाव आयोग के दिल्ली स्थित दफ्तर में शुरू हो गई है।

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग की ईवीएम मशीन हैक करने की चुनौती पर ज़ोर आज़मायश आज चुनाव आयोग के दिल्ली स्थित दफ्तर में शुरू हो गई है। आयोग की चुनौती को सिर्फ़ दो राष्ट्रीय पार्टियां एनसीपी और माकपा ने स्वीकार किया लेकिन माकपा हैकिंग नहीं करेगी सिर्फ सुझाव देगी। आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब से 14 ईवीएम मशीनें मंगवाई हैं जहां हाल ही में विधान सभी चुनावों में इनका इस्तेमाल हुआ था।

उधर नैनीताल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय निर्वाचन आयोग के ईवीएम चैलेंज के ख़िलाफ दायर याचिका ख़ारिज कर दी है। हाई कोर्ट का कहना है कि याचिका में को ी दम नही है और चुनाव आयोग को पूरा अधिकार है कि वह अपना संदेह दूर करे। हाई कोर्ट के इस फैसले को आयोग की जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

तीन राज्यों से मंगवाई गईं 14 ईवीएम

इस चैलेंज के लिए निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड से 14 ईवीएम मंगाई हैं। आयोग ने उन राज्यों से मशीनें मंगाई हैं, जहां हाल में चुनाव संपन्न हुए। पंजाब के पटियाला, बठिंडा, उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद व उत्तराखंड के देहरादून में इस्तेमाल हुई ईवीएम मंगवाईं गई हैं।

मदरबोर्ड चेंज करने की इजाज़त नहीं

चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ये ईवीएम चैलेंज होगा लेकिन इसे हैकॉथन नहीं कहा जा सकता। बता दें कि आम आदमी पार्टी ने ईवीएम का मदरबोर्ड चेंज करने की इजाज़त मांगी थी, लेकिन आयोग ने इसे खारिज कर दिया था। कहा कि अगर मदरबोर्ड ही चेंज कर दिया तो वो असली ईवीएम कैसे रहेगी।

चार-चार घंटे मिलेंगे दोनों पार्टियों को

शनिवार को दोनों पार्टियों को चार-चार मशीनें दी जाएंगी। सुबह दस बजे से उनका समय शुरू होगा और दोपहर दो बजे तक चार घंटों के दौरान उन्हें साबित करना होगा कि ईवीएम से छेड़छाड़ करके चुनाव परिणाम को प्रभावित किया जा सकता है। 

दो चरणों में होगी आज़मायश

पहले चरण में पार्टियों को यह साबित करना होगा कि ईवीएम में छेड़छाड़ करके प्रत्याशी या पार्टी विशेष को फायदा पहुंचाया गया। उन्हें कंट्रोल यूनिट में मौजूद परिणाम को बदलकर दिखाना होगा। इसके लिए वह मशीनों के बटनों का इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही मोबाइल व ब्लूटूथ जैसी डिवाइस के प्रयोग की भी आजादी होगी। दूसरे चरण में उन्हें साबित करना होगा कि विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई मशीनों में चुनाव से पहले छेड़छाड़ की गई थी। दोनों दलों के लिए दो अलग-अलग काउंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

आप ने पीछे खींचे क़दम

ईवीएम पर सबसे ज्यादा सवाल उठाने वाली आम आदमी पार्टी (आप) इस चैलेंज में हिस्सा नहीं लेगी। वह शनिवार को उसी समय चुनाव आयोग की तर्ज पर अपना समानांतर चैलेंज आयोजित करेगी।

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