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परिसीमन के मुद्दे पर साथ आया दक्षिण का विपक्ष, चेन्नई की बैठक में शामिल हुए कई बडे़ नेता

 Reported By: T Raghavan Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Mar 22, 2025 11:38 am IST,  Updated : Mar 22, 2025 11:43 am IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने परिसीमन पर बैठक से पहले विपक्षी नेताओं का स्वागत किया। बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूर्व प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए भाग नहीं लिया।

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परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण भारत के नेता एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। Image Source : FILE

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शनिवार को चेन्नई में परिसीमन पर संयुक्त कार्रवाई समिति यानी कि JAC की बैठक से पहले कई प्रमुख विपक्षी नेताओं का स्वागत किया। इस बैठक में दक्षिण भारत देश भर की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों ने हिस्सा लिया है। चर्चा से पहले स्टालिन ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और BRS नेता केटी रामाराव का स्वागत किया। बता दें कि परिसीमन के मुद्दे पर मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्य ही अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं।

बैठक में नहीं शामिल हुईं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी पूर्व प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए बैठक में शामिल नहीं हुईं। हालांकि, सत्र के दौरान उनके समर्थन को व्यक्त करने वाला एक पत्र पढ़ा गया। बैठक में ओडिशा की बीजू जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। पवन कल्याण के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश की NDA सहयोगी जन सेना पार्टी ने कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा। सत्र की शुरुआत तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा बैठक के महत्व पर सभा को संबोधित करने से हुई।

बैठक में शामिल हुए ये नेता

क्यों उठाया जा रहा है परिसीमन का मुद्दा?

परिसीमन संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों को जनसंख्या परिवर्तन के अनुसार पुनः परिभाषित करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग समान संख्या में लोग रहते हों। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो परिसीमन सीधे आकार से जुड़ा हुआ है। बड़ी आबादी वाले राज्यों को संसद में कम आबादी वाले राज्यों की तुलना में ज्यादा प्रतिनिधि मिलते हैं। दक्षिण के कई राज्यों की चिंता ये है कि उत्तर भारत के ज्यादा आबादी वाले राज्यों को परिसीमन में ज्यादा सीटें मिलेंगी जिससे संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।

‘विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए नाटक’

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी तमिलनाडु भर में काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन कर रही है, और आरोप लगा रही है कि डीएमके और मुख्यमंत्री स्टालिन परिसीमन बैठक का इस्तेमाल राज्य में व्याप्त "भ्रष्टाचार" से ध्यान हटाने के लिए कर रहे हैं। पार्टी ने एक बयान में कहा, "यह डीएमके की विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए एक राजनीतिक नाटक के अलावा और कुछ नहीं है।"

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