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'मध्य पूर्व में चल रही लड़ाई हमारी जंग नहीं है', सरकार के समर्थन में बोले कांग्रेस नेता मनीष तिवारी

 Published : Mar 19, 2026 02:29 pm IST,  Updated : Mar 19, 2026 02:29 pm IST

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने मध्य पूर्व संकट पर केंद्र सरकार की विदेश नीति का समर्थन करते हुए इसे भारत की लड़ाई नहीं बताया। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने पर जोर दिया। शशि थरूर ने भी संतुलित रुख और कूटनीति की सराहना की।

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कांग्रेस नेता मनीष तिवारी। Image Source : PTI FILE

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भारत इस संघर्ष में एक सीमित भूमिका वाला देश रहा है और सरकार का सतर्क रुख बिल्कुल सही है। मनीष तिवारी ने कहा, 'यह समझना जरूरी है कि पश्चिम एशिया में सिर्फ एक युद्ध नहीं चल रहा है, बल्कि कई तरह के संघर्ष एक साथ हो रहे हैं। इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच जो स्थिति है, वह सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि बड़े वैश्विक समीकरणों से जुड़ी है। यह हमारी लड़ाई नहीं है।'

'...तो हम सही दिशा में हैं'

तिवारी ने आगे कहा, 'हम हमेशा से इस क्षेत्र में एक सीमित भूमिका निभाते आए हैं। भारत को अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' बनाए रखनी चाहिए। अगर हम सोच-समझकर और सावधानी से कदम उठाते हैं, तो हम सही दिशा में हैं। रणनीतिक स्वायत्तता का मतलब है अपने हितों की रक्षा करना और हालात के अनुसार संतुलन बनाकर चलना।' बता दें कि इस मुद्दे पर कांग्रेस के एक और नेता शशि थरूर ने भी सरकार के रुख की सराहना की है। उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में लिखा कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सही नहीं ठहराया जा सकता और यह संप्रभुता और गैर-आक्रामकता के उन सिद्धांतों के खिलाफ है जिनका भारत हमेशा समर्थन करता आया है।

भारत के कूटनीतिक प्रयास तेज

बता दें कि भारत ने इस पूरे संकट के दौरान लगातार 'बातचीत और कूटनीति' पर जोर दिया है। एक तरफ भारत ने खाड़ी क्षेत्र में ईरान द्वारा किए गए हमलों की निंदा की, वहीं दूसरी ओर उसने तेहरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करते हुए तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी तेज किए हैं। खास तौर पर होरमुज़ जलडमरूमध्य, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अहम बना हुआ है।

भारत ने उठाए हैं संतुलित कदम

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई शहरों और ठिकानों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत ने संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है, जिसे अब कांग्रेस के दो कद्दावर नेताओं का भी समर्थन मिला है।

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