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बीमारी के कारण बचपन में हुआ इस युवक का टेढ़ा पैर, डाक्टर्स ने पैर सीधाकर दी नई जिंदगी

 Edited By: IANS
 Published : Oct 26, 2017 01:05 pm IST,  Updated : Oct 26, 2017 01:05 pm IST

बीमारी के कारण युवक बचपन से ही दिव्यांग की तरह जीवन व्यतीत कर रहा था और अपने दैनिक जीवन में बहुत सारी परेशानियों उठा रहा था। अब डाक्टरों ने उसके पैर को सीधा कर दिया जिससे उसे नई जिंदगी मिल गई।

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हेल्थ डेस्क: कोलकाता निवासी 25 वर्षीय युवक विशाल कुमार (बदला हुआ नाम) का एक पैर जन्म से पूरी तरह टेढ़ा था। बीमारी के कारण युवक बचपन से ही दिव्यांग की तरह जीवन व्यतीत कर रहा था और अपने दैनिक जीवन में बहुत सारी परेशानियों उठा रहा था।

अब डाक्टरों ने उसके पैर को सीधा कर दिया जिससे उसे नई जिंदगी मिल गई। यह कामयाबी जेपी हॉस्पिटल के ओर्थोपेडिक्स विभाग के चिकित्सक डॉ. सुमित भूषण शर्मा एवं उनकी टीम को मिली।

जेपी हॉस्पिटल के ओर्थोपेडिक्स विभाग के चिकित्सक डॉ. सुमित भूषण शर्मा ने बीमारी के बारे में विस्तार से बताया, " विशाल के अभिभावकों ने कम उम्र में बच्चे का ईलाज कराना जरूरी नहीं समझा और इस लापरवाही के कारण विशाल की उम्र 25 तक पहुंच गई। युवक बिना किसी सहारे के न तो सही से चल पाता था और न ही अपनी सामान्य गतिविधियों को सुचारू रूप से चला पाता था।"

उन्होंने कहा, "25 वर्ष की उम्र में टेढ़े पैर को सीधा करना लगभग असंभव होता है क्योंकि पैर पूरी तरह परिपक्व हो जाते हैं और ऑपरेशन द्वारा सीधा करने के बाद भी दोबारा टेढ़ा हो जाने की संभावना रहती है। 15 वर्ष की उम्र से कम में युवक के टेढ़े पैर को सीधा करना ज्यादा मुश्किल नहीं होता। वास्तव में 25 वर्षीय युवक के टेढ़े पैर को सीधा करने जैसा असाधारण कार्य विश्व भर में बहुत ही कम देखे गए हैं।"

चिकित्सक डॉ. सुमित भूषण शर्मा के अनुसार, इस बीमारी को क्लब फूट सेकेंड्री टू न्यूरोलॉजिकल प्रोब्लम्स डाउंस सिंड्रोम और स्पास्टिक क्लब फूट और नेगलेटेड क्लब फूट कहते हैं। बीमारी के कारण दूसरे पैर के भारी हिस्से में अल्सर और संक्रमण हो गए थे। युवक पैर सही तरह से जमीन पर नहीं रख पाता था और न ही चप्पल पहन पाता था। युवक को मस्तिष्क संबंधित बीमारियां भी हो गई थीं। कूल्हे एवं रीढ़ की हड्डी में गठिया बाई की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। पैर की मांसपेशियां पूरी तरह जकड़ गई थी।

जेपी हॉस्पिटल के हड्डी रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. अभिषेक ने बताया कि प्राथमिक तौर पर विशाल के पेट का अल्ट्रासाउंड किया गया तब बीमारी का पता चला। इस बीमारी का इलाज ट्रिपल अथ्रेडेसिस एंड टा लेंथनिंग प्रोसीजर द्वारा किया गया।

इस सर्जरी के तहत अलग-अलग चरण में कई ऑपरेशन करने पड़े और पैर की हड्डी के तीन जोड़ों को काटकर सीधा किया गया। इसके साथ ही पैर के साफ्ट टिशू को भी जोड़ा गया। पूरे प्रोसीजर में करीब तीन घंटे का समय लगा।

उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य था कि पहले विशाल का टेढ़ा पैर सीधा हो जाए और दूसरा उसके पैर दर्द मुक्त हो जाए और तीसरा विशाल के पैर का पंजा सामान्य पैर की तरह जमीन पर पड़े। हमें खुशी है कि हमारी मेहनत रंग लाई और विशाल को बोझिल जिंदगी से मुक्ति मिली। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कुछ महीनों तक सावधानी बरतने के बाद विशाल सामान्य युवक की तरह अपने सभी कार्य संपन्न कर सकेगा।"

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