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विश्व का एकमात्र मंदिर, जहां पर होगें भगवान विष्णु के पूरे 24 अवतार

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Aug 24, 2016 07:39 pm IST,  Updated : Aug 24, 2016 07:43 pm IST

इंदौर से 70 किलोमीटर दूर देपालपुर तहसील में विश्व का एक मात्र भगवान विष्णु के 24 अवतारों का भव्य मन्दिर बन रहा है। जो मई 2017 में बन कर तैयार हो जायेगा। इस मन्दिर का निर्माण सौ गांव के लोगों से सहयोग लेकर किया जा रहा है।

lord vishnu temple- India TV Hindi
lord vishnu temple

रजनी खेतान

इंदौर: भारत में भगवान विष्णु के कई मंदिर मौजूद है। जहां पर दर्शन करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ भी होती है। लेकिन हम आपको एक ऐसे मंदिक के बारें में बता रहे हैं। जहां पर आप बगवान विष्णु के एक रुप के नहीं बल्कि 24 अवतारों का दर्शन कर सकते हैं। जी हां एक ऐसा ही मंदिर बन कर तैयार हो रहा हैं। जो कि विश्व का एकमा6 मंदिर होगा। जहां पर एक ही मंदिर में विष्णु के पूरे अवतारों के दर्शन कर सकते है।

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इंदौर से 70 किलोमीटर दूर देपालपुर तहसील में विश्व का एक मात्र भगवान विष्णु के 24 अवतारों का भव्य मन्दिर बन रहा है। जो मई 2017 में बन कर तैयार हो जायेगा।  इस मन्दिर का निर्माण सौ गांव के लोगों से सहयोग लेकर किया जा रहा है। 30 बीघा जमीन में बनाने वाले इस मन्दिर में शिव के 11 रुद्र अवतार सहित नौ दुर्गाओं का भी मन्दिर होगा। यह मन्दिर सोमनाथ के मन्दिर की डिजाइन में तैयार किया जा रहा है। सबसे बडा मन्दिर 125 फीट है. जिसमें लोहे के सरिये का इस्तेमाल किये बिना 10 लाख ईटों से बनाया गया है।

साल 1968 में की गई थी इस मंदिर की परिकल्पना

सार्वभौम हिन्दुधर्म श्री 24 अवतार तत्व ज्ञान मन्दिर के नाम से बन रहा यह मन्दिर अपने आप में हिंदू धर्म का सबसे बडा विष्णु मन्दिर होगा। इस मन्दिर की परिकल्पन 1968 में अन्ंत श्री जयकरण दास भक्तमाली परमहंस महाराज ने की थी। उस समय मालवा अंचल का सबसे बडा विष्णु यज्ञ महाराज जी ने कराया था।

तब उस यज्ञ में देश के चारों मठों के शंकराचार्य सहित कई नामी साधु, संतों, महात्मा सहित उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला शामिल हुए थें। इस यज्ञ के बाद सभी ने यहां भगवान विष्णु का भव्य मन्दिर बनाने की बात कही। उसी समय सभी की उपस्थित में मन्दिर की नींव रखी गयी।

चूंकि बिडला जी भी उपस्थित थे तो उन्होनें इस मन्दिर के निर्माण करने की इच्छा जाहिर की लेकिन भक्तमाली महाराज जी ने उन्हें मना कर दिया। उन्होनें कहा कि यह मनिदर किसी एक व्यक्ति या परिवार के पैसों से नहीं बनाया जायेगा। किसान और मजदूरों की मेहनत की कमाई से मन्दिर का निर्माण कराया जायेगा।

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