महाराष्ट्र में हिंदू भाषा का विवाद एक बार फिर गर्माता जा रहा है। राज ठाकरे ने एमएनएस के प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई है। राज ठाकरे के घर शिवतीर्थ पर ये बैठक हो रही है। इस बैठक में महाराष्ट्र में लागू किए गए नई शिक्षा नीति के मुद्दे पर चर्चा की जा रही है।
हिंदी विरोध के मुद्दे पर जनता के बीच कैसे जाएं? कैसे मराठी लोगों और मराठी संगठनों को इस मुद्दे के साथ जोड़ा जाए? इन सभी विषयों पर राज ठाकरे के घर मंथन किया जा रहा है।
स्कुलों में पहली कक्षा से हिंदी पढ़ाने का राज ठाकरे विरोध कर रहे हैं। राज ठाकरे का कहना है की 'हम हिंदू हैं लेकिन हिंदी नहीं'। अगर सरकार फैसले को पीछे नहीं लेती है तो संघर्ष अटल है। यह चेतावनी राज ठाकरे पहले ही दे चुके हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन के बाद, 2025-26 शैक्षणिक वर्ष से मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी अनिवार्य तीसरी भाषा होगी। इसको लेकर तमिलनाडु के बाद अब महाराष्ट्र में विरोध होने लगा है।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रूप में चित्रित करने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है। अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको लगेगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आगामी चुनावों में मराठी और गैर-मराठी लोगों के बीच संघर्ष पैदा करने और इसका फायदा उठाने की कोशिश है?'
मनसे प्रमुख ने यह भी कहा कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है, फिर इसे महाराष्ट्र में छात्रों को शुरू से ही क्यों पढ़ाया जाना चाहिए। ठाकरे ने एक्स पर लिखा, 'आपका त्रिभाषी फॉर्मूला जो भी हो, उसे सरकारी मामलों तक सीमित रखें, शिक्षा में न लाएं।'
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